होम = News Big = मैं भी बंगाल की बेटी हूं…राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ममता बनर्जी पर किस बात को लेकर जताई नाराजगी?

मैं भी बंगाल की बेटी हूं…राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ममता बनर्जी पर किस बात को लेकर जताई नाराजगी?

by | Mar 7, 2026 | News Big, देश

Droupadi Murmu Siliguri visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में भाग लेने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पहुँचीं। इसके बाद उन्होंने सिलीगुड़ी उपमंडल के बिधाननगर में कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी। इस कारण कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित करना पड़ा।

राष्ट्रपति ने कहा, “मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है। ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, शायद वह मुझसे नाराज हैं। मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए गोशाईपुर जाना पड़ा, लेकिन मुझे इसका कोई गुस्सा नहीं है।” इसके बाद उन्होंने मूल स्थल पर जाकर अपनी बात रखी।

बीजेपी का ममता सरकार पर हमला

राष्ट्रपति की नाराजगी के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। पश्चिम बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह घटनाक्रम संवैधानिक ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था के पतन का संकेत है।

अमित मालवीय ने कहा, “भारत की राष्ट्रपति ने सिलीगुड़ी यात्रा के दौरान तैयारियों और प्रोटोकॉल की कमी पर खुले तौर पर नाराजगी व्यक्त की। राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के लिए अनुमति देने से इनकार किया, जबकि राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थीं। यह केवल अभद्रता नहीं, बल्कि संस्थागत अनादर है। बंगाल में शासन व्यवस्था अराजकता में डूबी है।”

संथाल समुदाय का महत्व

राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाल समुदाय की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साल 2003 को संथाल भाषा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा, क्योंकि इसी साल इसे भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में संविधान जारी किया गया था।

उन्होंने बताया कि 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी स्क्रिप्ट बनाई थी। हाल ही में इस स्क्रिप्ट की 100वीं वर्षगांठ मनाई गई। उनके योगदान ने संथाल भाषा बोलने वालों को अपनी संस्कृति और विचार व्यक्त करने का अवसर दिया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि संथाल समुदाय ने साहित्य और सामाजिक चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जैसे नाटक “बिदु चंदन,” “खेरवाल वीर,” “दलेगे धन,” और “सिदो कान्हू – संताल हुल।”

शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण

राष्ट्रपति ने आदिवासी युवाओं के लिए शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए और अपनी भाषा, संस्कृति तथा परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देना, समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखना एक मजबूत और सशक्त भारत के निर्माण में मदद करेगा।

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