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दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को उम्रकैद की सजा, देश में लगाया था मार्शल लॉ

by | Feb 19, 2026 | News Big, दुनिया

Yoon Suk-Yeol life imprisonment: दक्षिण कोरिया की अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में मार्शल लॉ लागू करने और सत्ता का दुरुपयोग करने, विद्रोह की साजिश रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि मृत्युदंड की संभावना थी, अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी।

राजनीतिक संकट

65 वर्षीय यून सुक येओल ने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस बलों को सक्रिय कर संसद पर नियंत्रण करने की कोशिश की थी। आरोप है कि उन्होंने उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली को अवैध तरीके से कब्जे में लेने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह कदम “राष्ट्र विरोधी ताकतों” को रोकने के लिए आवश्यक था, जो उनके एजेंडे में बाधा डाल रही थीं।

मार्शल लॉ करीब छह घंटे तक लागू रहा। भारी हथियारों से लैस सैनिकों और पुलिस ने संसद भवन घेर लिया था। हालांकि सांसदों ने अवरोध तोड़ते हुए सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में मतदान किया, जिसके बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा। इस घटना ने देश में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा कर दिया।

मृत्युदंड का विकल्प

जनवरी में अभियोजकों ने यून सुक येओल के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। उनका कहना था कि “असंवैधानिक और अवैध मार्शल लॉ ने नेशनल असेंबली और चुनाव आयोग के कामकाज को कमजोर किया और लोकतांत्रिक संवैधानिक व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास किया।” हालांकि दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद किसी को फांसी नहीं दी गई है, इसलिए मृत्युदंड व्यवहारिक रूप से लागू नहीं है।

कैबिनेट सदस्यों पर कार्रवाई

अदालत ने मार्शल लॉ लागू कराने में शामिल कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारियों को भी दोषी ठहराया। पूर्व रक्षा मंत्री किम यंग ह्यून को इस योजना में केंद्रीय भूमिका निभाने और सेना को सक्रिय करने के लिए 30 साल की जेल की सजा दी गई।

यून सुक येओल को पहले गिरफ्तारी का विरोध करने, मार्शल लॉ से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर करने और कानूनी रूप से अनिवार्य पूर्ण कैबिनेट बैठक किए बिना आपात आदेश जारी करने के लिए अतिरिक्त पांच साल की सजा भी सुनाई गई।

सियोल सेंट्रल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री Han Duck-soo और दो अन्य कैबिनेट सदस्यों को भी अलग मामलों में दोषी पाया। हान डक सू को 23 साल की सजा दी गई। उन पर आरोप था कि उन्होंने कैबिनेट बैठक के जरिए आदेश को वैध ठहराने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने और शपथ के तहत झूठ बोलने की कोशिश की। उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।

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