Iran Israel conflict: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के रहने वाले पांच लोग वर्तमान में दुबई के एक होटल में फंसे हुए हैं। यह परिवार होटल व्यवसायी अजय जैन का है, जिनके बेटे प्रिंस की अप्रैल में शादी होनी है। प्री-वेडिंग शूट के लिए प्रिंस उनका छोटा भाई मंगेतर और मंगेतर के भाई-भाभी चार दिन पहले दुबई गए थे।
बुर्ज खलीफा में खुशियों के बीच युद्ध का साया
परिवार दुबई के बुर्ज खलीफा के पास ठहरा हुआ था और शूटिंग के दौरान खुशियों से भरा माहौल था। प्रिंस और उनके परिवार ने नए जीवन की शुरुआत की तैयारी कर रहे थे। लेकिन 2 मार्च को भारत वापसी के लिए टिकट होने के बावजूद, ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध छिड़ने के कारण उनकी घर वापसी रुक गई। होटल के कमरे में फंसे परिवार ने अब सुरक्षित वापसी के लिए दुआएं मांगनी शुरू कर दी हैं।
परिवार वीडियो कॉल के जरिए अपने परिजनों से संपर्क बनाए हुए है। हालांकि, बातचीत में बच्चों के चेहरे पर डर और चिंता साफ दिखाई दे रही है। खुशियों की तैयारियों के बीच अचानक पैदा हुए इस तनाव ने परिवार की खुशी पर संकट डाल दिया है।
परिजनों की सरकार से मदद की गुहार
चंदौली में बैठे पिता अजय जैन ने बताया कि उनका परिवार आज ही भारत लौटना था, लेकिन अब युद्ध की स्थिति ने उन्हें दुबई में रोक दिया है। उन्होंने कहा, “बच्चों की सलामती हमारी प्राथमिक चिंता है। हम चाहते हैं कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और हमारे बच्चों को सुरक्षित भारत लौटाए।”
अजय जैन ने यह भी अपील की कि दुबई और अन्य जगहों पर फंसे तमाम भारतीयों को भी सुरक्षित वापस लाया जाए। घर में शादी की तैयारियों का माहौल अब चिंता और भय में बदल गया है। उन्होंने कहा कि परिवार पूरी उम्मीद के साथ सरकार की ओर देख रहा है।
फंसे भारतीयों की मुश्किलें
विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान और इज़राइल के बीच टकराव के चलते खाड़ी देशों में कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। यात्रा और वीजा प्रतिबंधों, फ्लाइट रद्द होने और सुरक्षा कारणों से कई परिवार अपने देश वापस नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे हालात में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रधानमंत्री और सरकार से अपेक्षाएं
परिवार ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वे तत्काल हस्तक्षेप करके फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीयों का भी प्रतिनिधित्व करता है जो खाड़ी और मध्य पूर्व में युद्ध या संघर्ष के बीच फंसे हुए हैं।

