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Budget 2026: 1 फरवरी को पेश होगा नया बजट, जानिए कैसे प्रभावित होंगे आपकी आमदनी और खर्चे

by | Jan 27, 2026 | News Big

Budget 2026: आने वाले 1 फरवरी 2026 को भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज होगा। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी, जिसमें सिर्फ देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नजरें भी टिकी रहेंगी। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब अमेरिका ने हाल ही में भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा दिया है। ऐसे समय में वैश्विक दबाव और घरेलू उम्मीदों के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

मुद्रास्फीति और जीडीपी: देश की आर्थिक स्थिति की झलक

बजट भाषण में अक्सर ‘मुद्रास्फीति’ और ‘जीडीपी’ जैसे शब्द सुनाई देते हैं। आम भाषा में मुद्रास्फीति का मतलब है महंगाई। अगर आपकी जेब में रखे नोट की कीमत कम हो और बाजार में सामान महंगा हो जाए, तो इसे मुद्रास्फीति कहा जाता है।

वहीं, जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद, देश की आर्थिक सेहत का रिपोर्ट कार्ड है। देश की सीमाओं में एक साल में उत्पादित सभी सामान और दी गई सेवाओं का कुल मूल्य ही जीडीपी कहलाता है। जब यह आंकड़ा बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि हो रही है।

फिस्कल डेफिसिट और कैपिटल खर्च की समझ

सरकार के खजाने की स्थिति को जानने के लिए ‘फिस्कल डेफिसिट’ और ‘कैपिटल एक्सपेंडिचर’ महत्वपूर्ण हैं। फिस्कल डेफिसिट वह अंतर है जब सरकार का खर्च उसकी आय से ज्यादा होता है और इसे पूरा करने के लिए वह उधार लेती है।

कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) वह पैसा है जो सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, पुल और स्कूल बनाने में खर्च करती है। इसे ‘अच्छा खर्चा’ माना जाता है क्योंकि यह भविष्य में देश की संपत्ति बढ़ाता है। इसके विपरीत, रेवेन्यू एक्सपेंडिचर रोजमर्रा के खर्च को दर्शाता है जैसे कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और प्रशासनिक खर्च।

डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स की जानकारी

बजट का सबसे चर्चा में रहने वाला हिस्सा टैक्स होता है। डायरेक्ट टैक्स सीधे आपकी जेब से सरकार में जाता है, जैसे इनकम टैक्स। जबकि इनडायरेक्ट टैक्स (GST आदि) वह टैक्स है जो आप दुकानदार को देते हैं, लेकिन वह सरकार के पास जाता है। आयात और निर्यात पर लगने वाला कस्टम ड्यूटी भी अर्थव्यवस्था और विदेशी सामान की कीमतों को प्रभावित करता है।

फिस्कल और मॉनेटरी पॉलिसी

सरकार की फिस्कल पॉलिसी बजट के जरिए तय होती है, जो टैक्स और खर्च को नियंत्रित करती है। वहीं, नोट छापने और ब्याज दरें (Repo Rate) तय करना RBI की मॉनेटरी पॉलिसी का हिस्सा है। बजट में अक्सर सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाने की रणनीति को डिसइन्वेस्टमेंट कहा जाता है। इसे आम भाषा में ऐसे समझा जा सकता है जैसे घर का सोना बेचकर जरूरी खर्च चलाना।

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