Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में किसी भी स्थान पर बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया था कि मुगल शासक बाबर एक हिंदू विरोधी आक्रमणकारी था, जिसने कई हिंदुओं के नरसंहार में भाग लिया, बावजूद इसके मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से मस्जिद का निर्माण हो रहा है।
मुर्शिदाबाद में मस्जिद निर्माण की आधारशिला
यह घटना 6 दिसंबर, 2025 को मुर्शिदाबाद में हुई जब जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के निर्माण की आधारशिला रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद निर्माण को किसी भी हाल में रोका नहीं जा सकता, क्योंकि बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 37 प्रतिशत है और इसे हर कीमत पर बनाए रखा जाएगा।
कबीर ने कहा कि पूजा स्थलों के निर्माण का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मस्जिद बनाना किसी मंदिर या चर्च के निर्माण के समान संवैधानिक अधिकार है और कोई कानूनी चुनौती इसे रोक नहीं सकती। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ पांच अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन इसका निर्माण जारी रहेगा।
कानून और संविधान के तहत अधिकार
कबीर ने अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारत के संविधान में किसी भी समुदाय के लिए पूजा स्थल या मस्जिद का निर्माण करना एक वैध अधिकार है। उनके अनुसार, यह अधिकार किसी भी कानून या याचिका द्वारा अवरुद्ध नहीं किया जा सकता।
बाबरी मस्जिद के साथ अन्य विकास परियोजनाएं
2 जनवरी, 2026 को कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण के साथ-साथ एक अस्पताल और विश्वविद्यालय बनाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना समुदाय के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि मस्जिद के निर्माण के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में भी लोगों के लिए लाभकारी कदम उठाए जाएंगे।

