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सुप्रीम कोर्ट में ही कराएंगे अंग्रेजी की परीक्षा…सीजेआई और वकील के बीच याचिका को लेकर हुई मजेदार बातचीत

by | Mar 10, 2026 | Cover Story Top, देश

Supreme Court funny petition: सुप्रीम कोर्ट में अक्सर महत्वपूर्ण और संवैधानिक मुद्दों पर याचिकाएं आती हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जिनका कोई वास्तविक औचित्य नहीं होता। हाल ही में ऐसा ही एक मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की बेंच के सामने आया, जिसने याचिकाकर्ता को न सिर्फ फटकारा बल्कि उसकी याचिका को बेतुका करार दिया।

बेतुकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया

मामला एक छोटे व्यापारी से जुड़ा था, जिसने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की कि उसे जैकेट बेचने पर टैक्स में कुछ छूट दी जाए। कोर्ट ने याचिका के स्वर और भाषा को देखकर तुरंत संदेह जताया कि यह याचिका खुद याचिकाकर्ता ने लिखी है या किसी और की मदद से तैयार की गई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है याचिकाकर्ता ने किसी ऐसे व्यक्ति से याचिका लिखवाई है, जिसने एक अस्पष्ट और बेतुकी याचिका तैयार की है। भविष्य में ऐसी याचिकाएं दायर न करने की सख्त चेतावनी दी जाती है।

CJI ने कोर्ट में ही याचिकाकर्ता से सवाल किए

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सीधे सवाल किए कि क्या उन्होंने याचिका खुद लिखी है। याचिकाकर्ता ने कहा कि हां, उन्होंने खुद लिखी है और अपनी पूरी जानकारी देने के लिए अपना फोन भी जमा कर सकते हैं। CJI ने पूछा कि उनकी पढ़ाई कितनी है, तो याचिकाकर्ता ने बताया कि वह 12वीं पास हैं और उन्होंने सनातन धर्म स्कूल, लुधियाना से पढ़ाई की है।

CJI ने तब याचिकाकर्ता को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह अंग्रेजी में 30 नंबर की परीक्षा पास नहीं कर पाए, तो याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “या तो आप सच बता दीजिए, वरना हम आप पर भारी जुर्माना लगाएंगे और जांच का आदेश देंगे।”

सीजेआई और वकील के बीच की बातचीत

CJI सूर्यकांत: क्या आपने यह याचिका खुद लिखी है?

याचिकाकर्ता: हां, मैंने खुद लिखी है. मैं अपना फोन यहां जमा कर सकता हूं.

CJI: आपकी पढ़ाई-लिखाई कितनी है?

याचिकाकर्ता: 12वीं पास

CJI: कौन से स्कूल से?

याचिकाकर्ता: सनातन धर्म स्कूल, लुधियाना

CJI: मैं यहीं कोर्ट में एक अंग्रेजी की परीक्षा करवाऊंगा…अगर आप उसमें 30 नंबर ले आए, तब मैं इसे देखूंगा

याचिकाकर्ता: हां-हां, मैं दे सकता हूं

CJI: या तो आप सच बता दीजिए, वरना हम आप पर भारी जुर्माना लगाएंगे और जांच के आदेश देंगे

याचिकाकर्ता: आप मेरा फोन देख सकते हैं

CJI: आपने इसमें ‘कॉर्पोरेट डोनर्स को फिडुशियरी रिस्क’ (fiduciary risk to corporate donors) जैसी बातें लिखी हैं… इसका मतलब क्या है?

वकील: मैं याचिका का हवाला दे सकता हूं.

CJI: मैं आखिरी बार पूछ रहा हूं कि यह किस वकील ने लिखी है? आपने इसे नहीं बनाया है.

वकील: मैंने एआई (AI) टूल्स की मदद ली है. मैंने एक टाइपिस्ट को 4 जैकेट भी गिफ्ट किए थे… और उसने टाइपिंग के लिए 1000 रुपये प्रति घंटा लिए… दास सर ने.

CJI: सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट ने यह याचिका बनाई है. उस टाइपिस्ट को यहां बुलाओ.

CJI: जाओ कुछ और स्वेटर बनाकर बेचो, ये सब करोगे तो कॉस्ट देना पड़ जाएगा.

याचिका की भाषा

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से याचिका में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ पूछा, जैसे कि “कॉर्पोरेट डोनर्स को फिडुशियरी रिस्क। याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि उसने AI टूल्स की मदद ली थी और याचिका टाइपिंग के लिए एक टाइपिस्ट को 1000 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से भुगतान किया था।

CJI ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आप इस तरह के मामले कोर्ट में लाएंगे तो इससे सिर्फ समय और संसाधन बर्बाद होंगे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “जाओ कुछ और स्वेटर बनाकर बेचो, ये सब करोगे तो कॉस्ट देना पड़ेगा।”

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस प्रकार की बेतुकी याचिकाएं दायर करने पर जांच और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि संवैधानिक मामलों में गंभीरता बनाए रखना आवश्यक है और अदालत के समय का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।

यह मामला दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट केवल बड़े और महत्वपूर्ण मुद्दों पर ही ध्यान नहीं देता बल्कि ऐसे बेतुके प्रयासों पर भी तत्काल प्रतिक्रिया देता है। कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि कानून और न्याय के प्रति गंभीरता आवश्यक है, और यदि कोई व्यक्ति बिना औचित्य के याचिका दायर करता है, तो उसे फटकार और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

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