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उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का शंखनाद : 9 सितंबर को होगा मतदान, जानिए कब, कैसे और कौन करेगा वोट

Vice Presidential Election 2025 : भारत निर्वाचन आयोग ने देश के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर 2025 (मंगलवार) को होगा और उसी दिन मतगणना कर परिणाम भी घोषित किया जाएगा।

चुनाव आयोग ने 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव के कार्यक्रम की पूरी समय-सारणी भी जारी कर दी है। इसके अनुसार :

  • चुनाव की अधिसूचना जारी होगी: 7 अगस्त 2025 (गुरुवार)
  • नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख: 21 अगस्त 2025 (गुरुवार)
  • नामांकनों की जांच की तारीख: 22 अगस्त 2025 (शुक्रवार)
  • नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि: 25 अगस्त 2025 (सोमवार)
  • मतदान की तिथि (यदि आवश्यक हो): 9 सितंबर 2025 (मंगलवार), सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
  • मतगणना (यदि आवश्यक हो): 9 सितंबर 2025 (मंगलवार)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत, उपराष्ट्रपति का चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से किया जाता है। इस चुनाव में संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — के सदस्य निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं।

निर्वाचक मंडल की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है :

  • राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (फिलहाल 5 सीटें रिक्त)
  • राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य
  • लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (फिलहाल 1 सीट रिक्त)

इस प्रकार कुल 788 में से 782 सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान करेंगे। चूंकि सभी निर्वाचक संसद सदस्य हैं, इसलिए हर सांसद के मत का मूल्य समान – 1 निर्धारित किया गया है। उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक पदों में दूसरा सबसे ऊंचा पद है और वह राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। वर्तमान उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने के मद्देनजर यह चुनाव कराया जा रहा है।

कैसे होगा इलेक्शन, एक ही दिन में वोटिंग और रिज़ल्ट

संविधान के अनुच्छेद 66 (1) में प्रावधान है कि निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार आयोजित किया जाएगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त मतपत्र (Secret Ballot Paper) द्वारा होगा। इस प्रणाली में, निर्वाचक को अभ्यर्थियों के नामों के सामने अधिमान (preference) अंकित करना होता है। अधिमान को भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप में, रोमन रूप में, या किसी भी मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं के रूप में चिह्नित (Mark) किया जा सकता है। अधिमान को केवल अंकों में चिह्नित किया जाना है और उन्हें शब्दों में निदर्शित (indicate) नहीं किया जाएगा। निर्वाचक उतने अधिमान चिह्नित कर सकता है जितनी अभ्यर्थियों की संख्या है। जबकि, मतपत्र के विधिमान्य (valid) होने के लिए पहला अधिमान चिह्नित करना अनिवार्य है, अन्य अधिमानों का चिह्नह्मांकन वैकल्पिक है।

मत चिह्नित करने के लिए, आयोग विशेष पेन (Pen) प्रदान करेगा। निर्वाचकों को यह पेन निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा मतदान केंद्र में मतपत्र सौंपे जाते समय दिया जाएगा। निर्वाचकों को केवल इस विशेष पेन से मतपत्र चिह्नित करना है न कि किसी अन्य पेन से। किसी अन्य पेन का उपयोग करके मतदान किए जाने पर मतगणना के समय मत अविधिमान्य हो जाएगा।