150 Years of Vande Mataram : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता की आराधना, ऊर्जा और संकल्प बताया।
वंदे मातरम: मंत्र, ऊर्जा और संकल्प
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “वंदे मातरम, ये शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। यह हमें इतिहास में ले जाता है, वर्तमान में नया आत्मविश्वास देता है और भविष्य के लिए नया हौसला प्रदान करता है। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जिसे हम भारतवासी पा न सकें।”
आतंक के विनाश में दुर्गा के रूप का उदाहरण
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के सामने भारत ने मानवता की सेवा के लिए कमला और विमला का स्वरूप अपनाया और जरूरत पड़ने पर दुर्गा का रूप लेकर आतंकवाद का विनाश भी किया।
वंदे मातरम: आजादी का गीत और गुलामी का विरोध
पीएम मोदी ने बताया कि गुलामी के समय वंदे मातरम स्वतंत्रता के संकल्प का प्रतीक बन गया था। उन्होंने कहा, “इसने देशवासियों के सामने स्वतंत्र भारत का सपना प्रस्तुत किया और अंग्रेजों द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।”
विभाजनकारी सोच आज भी चुनौती
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 1937 में ‘वंदे मातरम’ के कुछ महत्वपूर्ण पद अलग कर दिए गए थे, जिसने देश के विभाजन में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई। पीएम मोदी ने कहा कि आज की पीढ़ी को यह समझना जरूरी है कि यह अन्याय क्यों हुआ, क्योंकि वही विभाजनकारी सोच आज भी देश के लिए चुनौती है।

