PM Modi @75: इन दिनों गुजरात का वड़नगर खास चर्चा में है, जो एक महज छोटा-सा कस्बा है। करीब 40 हजार की आबादी वाले इस ऐतिहासिक कस्बे का नाम अब पूरी दुनिया जानती है, क्योंकि यहीं से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जीवन यात्रा की शुरुआत की थी। आज 17 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन है, जिस कारण से वड़नगर की गलियां सजी हुई हैं और चारों ओर काफी रौनक है।
वड़नगर, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने अपना बचपन बिताया और शिक्षा प्राप्त की, आज भी उनके जीवन से जुड़ी प्रेरणा का केंद्र है। यहां स्थित पीएम मोदी का शुरुआती स्कूल अब ‘प्रेरणा संकुल’ में विकसित किया गया है, जहां देशभर से चुनिंदा बच्चे सालभर शिक्षा और प्रेरणा लेने आते हैं।

खेल महोत्सव वड़नगर
खेल महोत्सव: अनुशासन और नेतृत्व का मंच
वड़नगर में आयोजित खेल महोत्सव युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना। क्रिकेट, कबड्डी, फुटसल, हैंडबॉल और खो-खो जैसी प्रतियोगिताओं में 5 टीमें, हर टीम में 75 खिलाड़ी शामिल हुए। मैदान पर ऊर्जा, अनुशासन और टीम भावना का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

“एक पेड़ मां के नाम” के तहत लगे 75 पेड़
इस मौके पर मां के सम्मान में 75 पेड़ लगाए गए, जो पर्यावरण संरक्षण और सेवा को जोड़ने का संदेश दे रहे थे। यह पहल वड़नगर से देशभर में एक प्रेरणा लहर की तरह फैली।
75 किलो का केक और 75 मोमबत्तियां
पीएम मोदी का जन्मदिन 75 किलो का केक और 75 मोमबत्तियों के साथ मनाया गया। हर मोमबत्ती नई आशा, नई ऊर्जा और नए संकल्प की प्रतीक बनी। इस प्रकाश ने पूरे आयोजन को और खास बना दिया।
समावेश और संवेदनशीलता का संदेश
जन्मदिन का सबसे भावुक पल तब आया, जब 75 differently-abled भाई-बहनों के साथ मिलकर केक काटा गया। यह समावेशन और संवेदनशीलता का अनूठा उदाहरण था, जिसने सभी के दिलों को छू लिया।

समावेश और संवेदनशीलता का संदेश
सेवा और सम्मान का पर्व
75 रिटायर्ड सेना कर्मियों की मौजूदगी ने जन्मदिन समारोह को और भव्य बना दिया। उनकी उपस्थिति ने सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत किया।
प्रेरणा का उत्सव
पूरे देश और दुनिया में पीएम मोदी का जन्मदिन मनाया गया, लेकिन वड़नगर का आयोजन सबसे अलग रहा।
- 75 पेड़ मां के नाम
- 75 किलो का केक और 75 मोमबत्तियाँ
- 75 खिलाड़ियों की पाँच टीमें
- 75 रिटायर्ड सेना कर्मियों का सम्मान
इन सभी आयोजनों ने जन्मदिन को सिर्फ एक जश्न नहीं, बल्कि प्रेरणा, सेवा और एकता का पर्व बना दिया।

