Intangible Heritage List : UNESCO ने इस साल भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) घोषित कर दिया है। इस मान्यता के बाद दुनिया भर में दीपावली को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा के रूप में पहचान मिलेगी।
अमूर्त धरोहर क्या होती है?
अमूर्त धरोहर वे सांस्कृतिक परंपराएं, कला, रीतियां और त्योहार होते हैं, जो किसी देश की पहचान और इतिहास को दर्शाते हैं।
यह सिर्फ इमारतों या स्मारकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि –
- कला
- पारंपरिक नृत्य
- अनुष्ठान
- लोकगीत
- त्योहार
- समाजिक प्रथाएँ
इन सभी को इसमें शामिल किया जा सकता है। UNESCO का उद्देश्य इन परंपराओं को वैश्वीकरण के दौर में सुरक्षित रखना है।
भारत के कौन-कौन से तत्व शामिल हैं UNESCO की अमूर्त धरोहर में?
2008
- कुटियाट्टम (केरल का संस्कृत नाट्य)
- वेदों का उच्चारण
- रामलीला प्रदर्शन
2009
- उत्तराखंड का रामम त्योहार
2010
- छाऊ नृत्य
- राजस्थान का कालबेलिया नृत्य
- केरल का मुडियेट्टू
2012
- लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार
2013
- मणिपुरी संकीर्तन
2014
- पारंपरिक तांबे-पीतल की कारीगरी
2016
- योग
2017
- कुंभ मेला
2021
- कोलकाता की दुर्गा पूजा
2023
- गुजरात का गरबा
2024
- पारसी त्योहार नवरोज
2025
- दीपावली
दीपावली को अमूर्त धरोहर का दर्जा क्यों मिला?
UNESCO ने माना कि दीपावली –
- अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है
- समुदायों को जोड़ती है
- पीढ़ियों से चली आ रही भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है
- दुनियाभर में लाखों लोग इसे मनाते हैं
यह त्योहार आज सिर्फ धार्मिक नहीं रहा बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।

