Opposition Party: संसद के बजट सत्र में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र की मोदी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव और अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ महाभियोग लाने की रणनीति ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
सत्र में विपक्षी दलों का आक्रामक रुख
विपक्षी दलों ने इस सत्र में आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और वाम दलों समेत कई विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरत रहे और विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा।
महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी
इसी बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने एक और बड़ा राजनीतिक दांव चला है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाई है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग की कुछ प्रक्रियाएं निष्पक्ष नहीं हैं और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी शिकायतों को लेकर उनकी चिंताएं अनसुनी की जा रही हैं।
विपक्ष पूरी तरह हमलावर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में संख्या बल भले ही सरकार के पक्ष में हो, लेकिन विपक्ष इन प्रस्तावों के जरिए सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है। इन मुद्दों पर सदन में लंबी बहस की संभावना है, जिससे विपक्ष को सरकार और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मंच मिल सकता है।
हालांकि सरकार का दावा है कि सभी संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं। लेकिन एक ही सत्र में दो बड़े प्रस्तावों की चर्चा ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।

