Waqf (Amendment) Act : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश सुनाया। अदालत ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन कुछ अहम प्रावधानों पर रोक लगा दी है।
धारा 3(1)(आर) पर रोक
अदालत ने धारा 3(1)(आर) के उस प्रावधान पर रोक लगाई है, जिसके तहत केवल वही व्यक्ति वक्फ बना सकता है जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो। कोर्ट ने कहा कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक राज्य सरकार यह तय करने के लिए नियम नहीं बना लेती कि इस अनुपालन का सत्यापन कैसे होगा।
संपत्ति जांच के प्रावधानों पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्ति की जांच से जुड़े प्रावधानों पर भी आंशिक रोक लगाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि—
- किसी भी संपत्ति को केवल नामित अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा।
- ऐसी रिपोर्टों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड और बोर्ड के रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किए जाएंगे।
- धारा 83 के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल का अंतिम फैसला होने तक वक्फ बोर्ड को उनकी संपत्तियों से बेदखल नहीं किया जाएगा और न ही आधिकारिक रिकॉर्ड में परिवर्तन होगा।
- इस दौरान उन संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार भी सृजित नहीं किए जाएंगे।
परिषद और बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य
कोर्ट ने कहा कि 22 सदस्यीय केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और 11 सदस्यीय राज्य वक्फ बोर्डों में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं।
सीईओ की नियुक्ति पर टिप्पणी
अदालत ने धारा-23 (सीईओ की पदेन सचिव के रूप में नियुक्ति) पर रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि, अदालत ने कहा कि जहां तक संभव हो, वक्फ बोर्ड का सीईओ मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी निर्देश अंतरिम प्रकृति के हैं और संशोधित प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर अंतिम बहस या निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगे।
अब तक की प्रमुख घटनाएं
- 03 अप्रैल : लोकसभा से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित।
- 04 अप्रैल : राज्यसभा से विधेयक को मंजूरी।
- 05 अप्रैल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी, कानून लागू।
- 05 अप्रैल : आप नेता अमानतुल्लाह खान, असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमपीएलबी समेत अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
- 17 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पक्ष रखने को कहा; केंद्र ने भरोसा दिया कि वक्फ यूजर/वक्फ डीड संपत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा।
- 25 अप्रैल : केंद्र ने याचिकाएं खारिज करने की मांग की।
- 29 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट ने कानून के विरुद्ध नई याचिकाओं पर विचार से इनकार किया।
- 05 मई : तत्कालीन सीजेआइ संजीव खन्ना ने सुनवाई की तारीख उत्तराधिकारी जस्टिस बी.आर. गवई के लिए तय की।
- 15 मई : सीजेआइ गवई ने अंतरिम राहत की सुनवाई 20 मई के लिए स्थगित की।
- 20-22 मई : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।
- 15 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट का फैसला—पूरे कानून पर रोक नहीं, लेकिन प्रमुख प्रावधानों पर रोक।

