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जिस पानी से बुझती प्यास, वही बन रहा मौत का हथियार, ज़िम्मेदार कौन?

by | Jan 17, 2026 | देश

News India’s campaign: दूषित पानी के खिलाफ न्यूज़ इंडिया की मुहिम: डॉक्टर कहते हैं कि बेहतर सेहत के लिए हर व्यक्ति को रोज़ कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए। धरती का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका है, लेकिन विडंबना यह है कि इस पानी का बहुत बड़ा हिस्सा खारा है, जो पीने योग्य नहीं है। जो थोड़ा-सा मीठा पानी बचता है, वही आज धीरे-धीरे ज़हर बनता जा रहा है। भारत में पीने का पानी न केवल कम हो रहा है, बल्कि तेजी से प्रदूषित भी हो रहा है। यह प्रदूषण अब बीमारियों की वजह बन चुका है और लोगों की जान पर सीधा खतरा बनकर मंडरा रहा है।

दूषित पानी के खिलाफ एक अहम मुहिम

न्यूज़ इंडिया ने दूषित पानी के खिलाफ एक अहम मुहिम शुरू की है, जो देश के उस सच को सामने लाती है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इस मुहिम के तहत न्यूज़ इंडिया की टीम उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के गंगनौली गांव तक पहुंची, जो दिल्ली के बिल्कुल पास स्थित है। कभी यहां का भूजल पीने योग्य हुआ करता था, लेकिन आज हालात इतने भयावह हैं कि साफ पानी एक सपना बन गया है।

आज भी ग्रामीणों को साफ पानी उपलब्ध नहीं

हैरानी की बात यह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों के बावजूद आज भी ग्रामीणों को साफ पानी उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। लोग मजबूरी में वही दूषित पानी पी रहे हैं, जो धीरे-धीरे उन्हें मौत की ओर धकेल रहा है। इलाज के लिए बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, लेकिन अधिकतर परिवारों की आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती। जीवन भर की कमाई इलाज में खर्च हो जाती है।

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का तांडव

गंगनौली गांव में दूषित पानी के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने तांडव मचा रखा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां 70 से अधिक लोगों की मौत कैंसर से हो चुकी है। गांव के लोग पीलिया, एलर्जी, त्वचा रोग और गुर्दे से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। गांव के आसपास स्थित फैक्ट्रियों और शुगर मिलों से निकलने वाले केमिकल्स कृष्णा नदी के माध्यम से ज़मीन के नीचे रिसते चले गए, जिससे भूजल पूरी तरह जहरीला हो गया।

उबालने के बाद भी पानी सुरक्षित नहीं

यह संकट केवल गंगनौली तक सीमित नहीं है। न्यूज़ इंडिया ने दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों की तस्वीरें भी दिखाईं, जहां नलों से काला, बदबूदार पानी आ रहा है। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में करोड़ों लोग ऐसे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। कई जगहों पर उबालने के बाद भी पानी सुरक्षित नहीं रहता। इस हालात ने टैंकर माफिया और बोतलबंद पानी के अवैध और महंगे कारोबार को जन्म दिया है। आज भारत में बोतलबंद पानी का कारोबार करीब 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

भूजल प्रदूषण के पीछे कई कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक, भूजल प्रदूषण के पीछे कई कारण हैं। फैक्ट्रियों के केमिकल, सीवेज का रिसाव, लैंडफिल से निकलने वाला जहरीला लीचेट, खेती में रसायनों का अत्यधिक इस्तेमाल और बारिश के पानी का ज़मीन में न समा पाना, ये सभी भूजल को जहरीला बना रहे हैं। गंदे पानी से डायरिया, टाइफाइड, पीलिया जैसी बीमारियां फैलती हैं। हर साल लगभग दो लाख लोगों की मौत केवल दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के कारण होती है।

पानी का केवल 4 प्रतिशत ही मीठा

आंकड़े बताते हैं कि धरती पर मौजूद कुल पानी का केवल 4 प्रतिशत ही मीठा है और उसमें से भी बड़ा हिस्सा ग्लेशियरों में जमा है। पीने योग्य पानी करीब 1 प्रतिशत ही बचता है, जिसमें भूजल की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। भारत की लगभग 86 प्रतिशत ग्रामीण आबादी भूजल पर निर्भर है। लेकिन लगातार बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और घटती बारिश ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।

सरकार ने 2019 में जल जीवन मिशन यानी नल जल योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से पानी पहुंचाना है। इसके लिए 67,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया। हालांकि ज़मीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें आने वाला पानी या तो गंदा है या फिर आता ही नहीं।

जीवन कैसे बचेगा?

न्यूज़ इंडिया की यह मुहिम सिर्फ खबर दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार, प्रशासन और समाज सभी से सवाल पूछती है। जब पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं होगा, तो जीवन कैसे बचेगा? न्यूज़ इंडिया ने साहस के साथ इस राष्ट्रीय संकट को सामने लाकर एक ज़रूरी बहस छेड़ी है। दूषित पानी के खिलाफ यह मुहिम न केवल जागरूकता फैलाती है, बल्कि बदलाव की मांग भी करती है। क्योंकि सवाल साफ है, अगर आदमी पिएगा नहीं, या ज़हर पिएगा, तो जिएगा कैसे?

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