Supreme Court on Firecrackers : दिवाली और अन्य मौकों पर प्रदूषण को देखते हुए पटाखों पर पाबंदी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी एक शहर के लिए अलग नियम नहीं बनाए जा सकते। अदालत ने कहा कि यदि पटाखों पर रोक लगानी है तो यह फैसला पूरे देश में समान रूप से लागू होना चाहिए, केवल दिल्ली के लिए नहीं।
दिल्ली-विशेष नीति पर आपत्ति
शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए जो भी कदम उठाए जाएं, वे सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली को लेकर विशेष नीति नहीं बनाई जा सकती।
चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि एनसीआर के नागरिकों को स्वच्छ हवा का अधिकार है, तो यह अधिकार देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “हम केवल इसलिए दिल्ली के लिए कोई अलग कानून नहीं बना सकते कि यहां देश का एलीट वर्ग निवास करता है। प्रदूषण के खिलाफ जो भी नीति बनेगी, उसे पूरे भारत में लागू करना होगा।”
पुराने आदेश पर उठे सवाल
दरअसल, यह सुनवाई 3 अप्रैल को दिए गए उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हुई, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री, भंडारण, ढुलाई और निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि ऐसे नियम केवल एक क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रह सकते।
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दिवाली पर असर?
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on Firecrackers) की इस टिप्पणी के बाद साफ है कि पटाखा बैन को लेकर आगे की नीति अब पूरे देश के लिए तय होगी। दिल्ली-एनसीआर तक सीमित पाबंदी की संभावना बेहद कम हो गई है।

