Hindi Diwas 2025: हिंदी सिर्फ बोलने या लिखने की भाषा नहीं है, बल्कि यह भारतीयों के बीच भाव व्यक्त करने का तरीका भी है। इस भाषा को सम्मान देने के लिए 1949 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारतीय संविधान सभा ने इसी दिन हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में अपनाया था।
इसके बाद हिंदी का महत्व और बढ़ा। हालांकि अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं का दबाव रहता है, फिर भी हिंदी बोलने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। डिजिटल दुनिया में भी हिंदी की मांग और प्रभाव बढ़ रहा है।
हिंदी दिवस 2025 की थीम
भारत सरकार हिंदी दिवस 2025 की थीम की घोषणा समारोह से पहले आधिकारिक तौर पर करेगी। पिछले सालों की थीम में डिजिटल संचार और सांस्कृतिक बातचीत के क्षेत्रों में हिंदी की ताकत पर जोर दिया गया है। 2025 के लिए, “हिंदी: राष्ट्रीय एकता और वैश्विक पहचान की ताकत” थीम होने की उम्मीद है। यह थीम नए क्षेत्रों में हिंदी के विस्तार पर जोर देगी।
डिजिटल दुनिया में आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जमाना है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एआई का असर साफ दिख रहा है। ऐसे में हिंदी सिर्फ बोलचाल या किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
AI का भविष्य हिंदी से जुड़ा
सोचने में अजीब लग सकता है कि एआई (AI) का भविष्य हिंदी पर निर्भर हो सकता है, लेकिन ऐसा है। ज्यादा लोग AI सर्च और वॉइस असिस्टेंट में हिंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं। जब किसी सवाल का जवाब चाहिए या कुछ सर्च करना होता है, तो हिंदी की मांग सबसे ज्यादा होती है।
लिखने से ज्यादा बोलचाल में हिंदी
रिपोर्ट्स के अनुसार, 90% से ज्यादा वॉइस सर्च हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में होती है। अंग्रेजी वॉइस सर्च उपयोगकर्ताओं की संख्या बहुत कम है। लोग लिखने की बजाय बोलकर हिंदी में सर्च करना पसंद करते हैं।
Google की भी हिंदी पर पकड़ मजबूत
पिछले कुछ सालों में गूगल जैसी कंपनियों ने हिंदी यूजर्स के लिए प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। Google Translate, Google Discover और अन्य सुविधाओं में हिंदी को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय भाषाओं के कंटेंट को बढ़ावा भी मिलता है।
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