होम = देश = SC ने दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों के उत्पादन को दी हरी झंडी, बिक्री पर फैसला 8 अक्टूबर को

SC ने दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों के उत्पादन को दी हरी झंडी, बिक्री पर फैसला 8 अक्टूबर को

by | Sep 26, 2025 | देश

Supreme Court on firecrackers :  दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण पाबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ किया कि वह पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में ग्रीन पटाखों के उत्पादन की अनुमति दी जाएगी, जबकि उनकी बिक्री को लेकर अंतिम निर्णय 8 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।

क्यों हुआ विवाद?

दिल्ली सरकार ने इस साल वायु प्रदूषण को देखते हुए पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसी तरह यूपी और हरियाणा सरकार ने भी एनसीआर के अन्य शहरों में रोक लगाई थी। इस फैसले को पटाखा कारोबारियों की संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना है कि उनके पास 2027-28 तक वैध लाइसेंस हैं, जिन्हें अदालत के पुराने आदेशों के आधार पर रद्द किया जा रहा है। कारोबारियों ने मांग की कि उन्हें ग्रीन पटाखों के उत्पादन और बिक्री की अनुमति दी जाए और वे इसके लिए तय सभी मानकों का पालन करने को तैयार हैं।

कोर्ट की आपत्ति: सिर्फ दिल्ली में ही रोक क्यों?

12 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में बेंच ने सवाल उठाया था कि पटाखों पर रोक सिर्फ दिल्ली में ही क्यों लगाई गई है, जबकि इसके लिए पूरे देश में एक समान नीति होनी चाहिए। अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से इस पर रिपोर्ट मांगी थी।

रिपोर्ट में क्या निकला?

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष CAQM ने बताया कि नेशनल इनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखों का फॉर्मूला तैयार किया है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने इन्हें बनाने वाले निर्माताओं को लाइसेंस भी दिया है। हालांकि, पिछले साल जारी किए गए क्यूआर कोड के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आई थीं।

व्यापारियों की दलील

पटाखा व्यापारियों ने कोर्ट में कहा कि वे सरकार या अदालत की हर शर्त मानने को तैयार हैं। चाहे तो उत्पादन से लेकर बिक्री तक किसी भी स्तर पर औचक जांच की जाए, जहां गड़बड़ी मिले वहां कार्रवाई हो। लेकिन पूरी तरह रोक लगाना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उत्पादन की अनुमति नहीं मिली तो बाद में बिक्री का आदेश आने पर आपूर्ति नहीं हो पाएगी।

कोर्ट का रुख

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा कि पूर्ण पाबंदी बेअसर साबित हुई है। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वैध खनन पर रोक लगी तो अवैध खनन और माफिया सक्रिय हो गए। अदालत ने एनसीआर क्षेत्र में PESO से लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं को उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिक्री की अनुमति बिना अदालत के आदेश के नहीं होगी।

अब केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह सभी पक्षों से बातचीत कर पटाखों की बिक्री को लेकर समाधान खोजे और 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट रखे।

ये भी पढ़े : जोधपुर में देश का तीसरा अक्षरधाम मंदिर बनकर तैयार, संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक

बंगाल