Air Ambulance Crash: दस साल के अंतराल पर सामने आए दो एयर एम्बुलेंस हादसों ने देश को फिर झकझोर दिया है। हैरानी की बात यह है कि दोनों घटनाओं में विमान एक ही श्रेणी का था, सवार यात्रियों की संख्या भी समान थी और उद्देश्य भी एक मरीज की जान बचाना। लेकिन अंजाम बिल्कुल विपरीत रहा।
झारखंड 2026: टेकऑफ के बाद मौत का सफर
23 फरवरी को रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस टेकऑफ के कुछ ही देर बाद झारखंड के चतरा ज़िले में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। रेडबर्ड एविएशन द्वारा संचालित यह बीचक्राफ्ट किंग एयर विमान खराब मौसम से जूझ रहा था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनुसार, विमान ने शाम 7:11 बजे उड़ान भरी थी और 7:34 बजे तक कोलकाता ATC से संपर्क में था। इसके बाद अचानक रडार और संचार टूट गया।
माना जा रहा है कि घने जंगल और तेज़ आंधी-तूफान के बीच विमान नियंत्रण खो बैठा। जब राहत टीमें मौके पर पहुंचीं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जंगल के भीतर फैले मलबे से शवों को निकालने में कर्मचारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई।
कौन थे सवार?
विमान में दो क्रू मेंबर, एक गंभीर रूप से झुलसा मरीज संजय, उनकी पत्नी अर्चना, एक रिश्तेदार और अस्पताल स्टाफ मौजूद था। संजय को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल ले जाया जा रहा था। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले परिजनों ने इलाज के लिए कर्ज लेकर एयर एम्बुलेंस बुक की थी, लेकिन मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही सब कुछ खत्म हो गया।
हादसे की जांच अब एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच कर रही है, जिसमें विमान की तकनीकी स्थिति और ऑपरेटर के सेफ्टी रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल है।
2016: नजफगढ़ में बची सात जानें
इसके ठीक उलट, 2016 में दिल्ली के नजफगढ़ के पास एक एयर एम्बुलेंस ने चमत्कारी ढंग से इमरजेंसी लैंडिंग की थी। एल्केमिस्ट ग्रुप द्वारा संचालित बीचक्राफ्ट किंग एयर C90 पटना से दिल्ली आ रहा था, तभी लैंडिंग से कुछ पहले उसके दोनों इंजन फेल हो गए। पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को नजफगढ़ के कैर गांव के एक खुले मैदान में उतार दिया। उस वक्त विमान दिल्ली एयरपोर्ट से महज़ छह नॉटिकल मील दूर था। सातों लोग मरीज, डॉक्टर, टेक्नीशियन और क्रू ज़िंदा बच गए। घायल हुए यात्रियों को तुरंत मेदांता मेडिसिटी पहुंचाया गया।
समानताएं और फर्क
दोनों घटनाओं में कई चौंकाने वाली समानताएं हैं-
दोनों एयर एम्बुलेंस थीं
दोनों में सात लोग सवार थे
दोनों बीचक्राफ्ट किंग एयर विमान थे
दोनों गंभीर मरीज को इलाज के लिए ले जा रहे थे
फर्क सिर्फ हालात और लोकेशन ने पैदा किया। 2016 में खुला मैदान और त्वरित निर्णय जीवन रक्षक बन गया, जबकि 2026 में घना जंगल और खराब मौसम मौत का कारण बने।
पुराने ज़ख्म भी याद दिलाते हैं खतरा
भारत में एयर एम्बुलेंस हादसे नए नहीं हैं। 2011 में फरीदाबाद में एक एयर एम्बुलेंस क्रैश में 10 लोगों की जान गई थी। 2015 में द्वारका के पास एक BSF विमान तकनीकी खराबी के बाद गिरा, जिसमें कोई भी नहीं बचा।
सबक क्या?
ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि तकनीक, प्रशिक्षण और परिस्थितियां तीनों का संतुलन कितना ज़रूरी है। एक ही विमान और एक ही मिशन, लेकिन एक जगह मौत, दूसरी जगह जीवन। आसमान में कभी-कभी कुछ सेकंड और कुछ फैसले ही इतिहास लिख देते हैं।
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