ISRO MIssion Gaganyan: भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से जिस परीक्षण पर नजरें टिकी थीं, वह आखिरकार सफल हो गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने गगनयान मिशन के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसे मिशन की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
सिस्टम भरोसेमंद
अंतरिक्ष में जाना जितना चुनौतीपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा कठिन होता है वहां से सुरक्षित वापस लौटना। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह टेस्ट किया गया। परीक्षण के दौरान एक डमी क्रू मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराया गया, जहां पैराशूट सिस्टम ने बिल्कुल सही समय पर काम किया और लैंडिंग प्रक्रिया को नियंत्रित किया। इससे साफ हो गया कि रिएंट्री के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला सिस्टम भरोसेमंद है।
देश की तकनीकी ताकत का प्रतीक
यह परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में आयोजित किया गया। इस सफलता पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ISRO की टीम को बधाई देते हुए इसे देश की तकनीकी ताकत का प्रतीक बताया। वहीं ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि गगनयान से पहले तीन मानवरहित मिशन भेजे जाएंगे। फिलहाल पहला अनक्रूड मिशन तैयारी के अंतिम चरण में है और सभी गतिविधियां योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।
क्या है असली चुनौती
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरिक्ष मिशन में लॉन्च के बाद असली चुनौती लंबे समय तक ऑपरेशन बनाए रखना होता है। उदाहरण के तौर पर, मंगल ऑर्बिटर मिशन में करीब 300 दिनों तक लगातार संचालन किया गया था, तब जाकर सफलता मिली। गगनयान के इस सफल परीक्षण ने यह संकेत दे दिया है कि भारत अब मानव को अंतरिक्ष में भेजने और सुरक्षित वापस लाने के अपने सपने के बेहद करीब पहुंच चुका है।
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