Republic Day 2026: भारत के लोकतंत्र की सबसे भव्य तस्वीर हर साल 26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में देखने को मिलती है। गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत के संविधान, संप्रभुता और विविधता का जीवंत उत्सव है। Republic Day 2026 के अवसर पर जब एक बार फिर दिल्ली का कर्तव्य पथ देश और दुनिया की निगाहों का केंद्र बनेगा, तब यह जानना ज़रूरी है कि कैसे राजधानी दिल्ली गणतंत्र दिवस के इतिहास की साक्षी रही है और किन-किन पलों ने देश की स्मृतियों में अमिट छाप छोड़ी है।
1950: जब दिल्ली बनी गणराज्य की गवाह
26 जनवरी 1950 को भारत ने स्वयं को एक संपूर्ण गणराज्य घोषित किया। इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। दिल्ली के इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद स्टेडियम) में आयोजित समारोह ने देश की नई लोकतांत्रिक यात्रा की नींव रखी। यह वही पल था जब संविधान लागू हुआ और सत्ता जनता के हाथों में सौंपी गई।
राजपथ से कर्तव्य पथ तक का सफर
दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ वर्षों तक गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य मंच रहा। समय के साथ इस मार्ग ने कई ऐतिहासिक बदलाव देखे। वर्ष 2022 में इसे ‘कर्तव्य पथ’ नाम दिया गया, जिसने राष्ट्रीय कर्तव्य और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखा। Republic Day 2026 में भी कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड आधुनिक भारत और उसकी परंपराओं के संतुलन को दर्शाएगी।
परेड: सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का संगम
दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन करती है। आधुनिक मिसाइलें, टैंक, लड़ाकू विमान और स्वदेशी रक्षा तकनीक देश की सामरिक क्षमता को दुनिया के सामने रखती है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों की झांकियां भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और विकास कार्यों को दर्शाती हैं। दिल्ली की परेड हमेशा इस बात का प्रतीक रही है कि भारत अनेकताओं में एकता का देश है।
विदेशी मेहमान और वैश्विक संदेश
गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने वाले मुख्य अतिथि अक्सर विश्व राजनीति में भारत की स्थिति को दर्शाते हैं। दिल्ली ने वर्षों में अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया है। यह आयोजन भारत की कूटनीतिक ताकत और वैश्विक भूमिका का भी संकेत देता है। गणतंत्र दिवस 2026 में भी दिल्ली एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति को रेखांकित करेगी।
दिल्ली और आम जनता की भागीदारी
गणतंत्र दिवस सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं है। दिल्ली के नागरिकों के लिए यह गर्व, उत्साह और देशभक्ति का दिन होता है। सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के बीच हजारों लोग सुबह से ही परेड देखने के लिए कर्तव्य पथ पहुंचते हैं। स्कूलों के बच्चे, एनसीसी कैडेट्स और लोक कलाकार इस आयोजन को जनभागीदारी का उत्सव बनाते हैं।
बदलावों की झलक: नया भारत, नई पहचान
पिछले कुछ वर्षों में गणतंत्र दिवस समारोह में कई बदलाव देखने को मिले हैं। स्वदेशी तकनीक, महिला सैन्य अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी और लोक कलाकारों की प्रमुख भूमिका ने परेड को और समावेशी बनाया है। दिल्ली में आयोजित यह आयोजन अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि बदलते भारत की कहानी भी कहता है।
आपातकाल से लेकर लोकतांत्रिक मजबूती तक
दिल्ली ने ऐसे दौर भी देखे हैं जब लोकतंत्र चुनौतियों से गुज़रा। आपातकाल के बाद भी गणतंत्र दिवस का आयोजन लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का प्रतीक बना। हर साल यह दिन याद दिलाता है कि संविधान सर्वोच्च है और लोकतंत्र जनता की शक्ति से चलता है।
भविष्य की ओर एक नज़र
Republic Day 2026 सिर्फ अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी मंच होगा। विकसित भारत, आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति और सामाजिक समरसता जैसे विषयों की झलक दिल्ली की परेड और कार्यक्रमों में साफ दिखाई देगी।
ये भी पढ़ें: PM मोदी का दक्षिण भारत दौरा, केरल में विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात; तमिलनाडु में जनसभा संबोधन
