Putin India Visit: रूस–यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4–5 दिसंबर को भारत पहुंच रहे हैं, और यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में नई हलचल पैदा कर रहा है। जहां रूस अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भरोसेमंद साझेदार की तलाश में है, वहीं भारत ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।
पहले किस पर होगी नजर
सबसे पहले नजर व्यापार पर होगी। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस के पास सीमित व्यापारिक रास्ते बचे हैं। इसके बावजूद भारत लगातार रूस से तेल और अन्य सामान खरीद रहा है, जबकि अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी आयात शुल्क का दबाव भी बना हुआ है। पुतिन का फोकस दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले कुछ वर्षों में 100 अरब डॉलर तक ले जाने पर रहेगा।
रुपया–रूबल लेनदेन प्रणाली
इस दौरे की सबसे अहम कड़ी है रुपया–रूबल लेनदेन प्रणाली को मजबूत बनाना। रूस चाहता है कि दोनों देशों के बीच भुगतान डॉलर पर निर्भर न रहे। इससे व्यापार सुरक्षित और तेज होगा। पुतिन ने संकेत दिया है कि अब रूस भारत के उत्पादों का बड़ा खरीदार बनने के लिए तैयार है। नई दिल्ली में होने वाले भारत–रूस बिजनेस फोरम में इसी पर चर्चा होगी, साथ ही रूस भारतीय उद्योगों और कुशल श्रमिकों के लिए अपने बाजार खोलने की योजना भी रखेगा।
सबसे संवेदनशील मुद्दा
भारत के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा तेल आयात है। अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ के कारण रूस से तेल खरीदना महंगा और जटिल हो गया है। पुतिन के साथ आ रहे रोजनेफ्ट और गैजप्रॉमनेफ्ट के अधिकारी इस मुद्दे के समाधान पर बातचीत करेंगे। माना जा रहा है कि भारत रूसी सुदूर पूर्व में सखालिन-1 प्रोजेक्ट में ओएनजीसी विदेश की हिस्सेदारी 20% तक बढ़ाने का प्रस्ताव आगे रख सकता है।
कुल मिलाकर, पुतिन की यह यात्रा भारत–रूस साझेदारी को एक नए मोड़ पर ले जाने वाली है, जहाँ कूटनीति, ऊर्जा और व्यापार तीनों दांव पर हैं।
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