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SIR पर मचा सियासी बवाल: 12 राज्यों में कल से मतदाता सूची पुनरीक्षण, विपक्ष ने जताया विरोध

by | Nov 3, 2025 | देश

Sir Process: 4 नवंबर से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। चुनाव आयोग की इस पहल को जहां लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं कई विपक्षी दल इसे “मतदाता सूची से नाम काटने की साजिश” कहकर विरोध कर रहे हैं।

अभियान के खिलाफ सियासी लामबंदी

तमिलनाडु से लेकर पश्चिम बंगाल तक इस अभियान के खिलाफ सियासी लामबंदी देखने को मिल रही है। दक्षिण भारत में डीएमके ने इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कांग्रेस, वामपंथी दलों और कमल हासन की पार्टी समेत कई सहयोगियों के साथ बैठक कर कहा, यह मतदाता सूची में हेराफेरी का रास्ता खोलता है। डीएमके की मांग है कि यह प्रक्रिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हो, लेकिन चुनाव आयोग ने इनकार कर दिया।

ममता दीदी ने संभाला मोर्चा

इधर पश्चिम बंगाल में CM ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है। टीएमसी ने 4 नवंबर को कोलकाता में विरोध मार्च का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि यह “खामोशी से की जाने वाली चुनावी धांधली” है, जिसका जवाब सड़क से दिया जाएगा।

अखिलेश यादव भी नहीं रहे पीछे

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने SIR के साथ जातीय जनगणना जोड़ने की मांग रखी है। अखिलेश यादव का कहना है कि “इतनी बड़ी एक्सरसाइज में एक कॉलम जातियों का भी जोड़ा जाए।” हालांकि पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव का मानना है कि इस प्रक्रिया से विपक्षी वोटरों को निशाना बनाया जाएगा।

संजय सिंह का आरोप

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार में SIR के बाद भी मतदाता सूची में करीब पांच लाख डुप्लीकेट वोटर हैं। उन्होंने इसे “चुनावी फरेब” बताया। कांग्रेस ने भी इसे लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि “यह विपक्षी वोटरों को लिस्ट से हटाने की सुनियोजित चाल है।”

4 नवंबर से 4 दिसंबर तक

केरल की लेफ्ट सरकार ने भी चुनाव आयोग से पुनर्विचार की मांग की है। वाम दलों का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह संशोधन लागू करना अनुचित है। चुनाव आयोग के अनुसार, 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक घर-घर जाकर मतदाता गणना होगी। 9 दिसंबर को ड्राफ्ट लिस्ट जारी की जाएगी और आपत्तियां 8 जनवरी 2026 तक ली जाएंगी। 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि यह अभियान 12 राज्यों के 51 करोड़ मतदाताओं को कवर करेगा और “भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी कवायद” होगी।

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