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पार्टी ने छोड़ा, सिस्टम ने जोड़ा, हरिवंश का नया अध्याय शुरू, राष्ट्रपति ने थामा हाथ

Rajya Sabha Membership: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। जिस दिन उनका कार्यकाल समाप्त होना था, उसी दिन उन्हें एक बड़ा राजनीतिक ‘सरप्राइज’ मिल गया। जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बार उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा, जिससे उनकी संसदीय पारी खत्म मानी जा रही थी। लेकिन ऐन मौके पर सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति के कोटे से फिर उच्च सदन में एंट्री दिला दी।

तीसरा कार्यकाल पक्का

गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना (Gazette Notification) के मुताबिक, राष्ट्रपति ने एक नामित सदस्य के रिटायर होने से खाली हुई सीट पर हरिवंश को मनोनीत किया है। इसके साथ ही अब उनका तीसरा कार्यकाल पक्का हो गया है और वे अगले छह साल तक राज्यसभा का हिस्सा बने रहेंगे।

संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 सदस्यों को नामित करने का अधिकार होता है। आमतौर पर साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को यह मौका दिया जाता है। हरिवंश पेशे से वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।

क्या-क्या रहे पद

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से आने वाले हरिवंश पहली बार 2014 में राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद उन्हें 2018 में उपसभापति चुना गया और 2020 में फिर इस पद पर दोबारा निर्वाचित हुए। अब तीसरी बार सदन में उनकी वापसी के साथ ही एक नया सवाल खड़ा हो गया है की क्या वे फिर से उपसभापति पद पर काबिज होंगे? फिलहाल, उनकी इस अप्रत्याशित वापसी ने सियासी गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

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