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पहलगाम की वो काली तारीख, एक साल बाद भी जिंदा है दर्द… क्या मिला इंसाफ या बाकी है हिसाब?

by | Apr 21, 2026 | News Top, देश

Pahalgam Attack Anniversary: देश आज भी उस दर्दनाक दिन को नहीं भूला है, जब कश्मीर की खूबसूरत वादियां अचानक खून और बारूद की गंध से भर गई थीं। 22 अप्रैल 2025 यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐसा जख्म है, जिसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया था। अब उस भयावह हमले की पहली बरसी से पहले, यादें फिर ताजा हो गई हैं।

बैसरन घाटी में बिखरा था मातम

बैसरन घाटी, जिसे अक्सर ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है, उस दिन चीखों और गोलियों की गूंज से कांप उठी थी। आतंकियों ने निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की। इस कायराना हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जबकि कई परिवार हमेशा के लिए उजड़ गए। हमले की भयावहता इतनी थी कि वहां मौजूद लोग समझ ही नहीं पाए कि अचानक क्या हो गया। कुछ ही मिनटों में सुकून की वादियां मौत के मंजर में बदल गईं।

सेना का सख्त संदेश

पहली बरसी से एक दिन पहले Indian Army ने सोशल मीडिया पर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जब इंसानियत की सीमाएं लांघी जाती हैं, तो जवाब भी निर्णायक होता है। सेना ने साफ किया कि भारत न तो भूलता है और न ही माफ करता है न्याय सुनिश्चित किया गया है और देश एकजुट खड़ा है।

ऑपरेशन सिंदूर से दिया गया जवाब

हमले के बाद देश में गुस्सा उबाल पर था। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ चलाकर आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। 6-7 मई के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई साफ संदेश थी कि भारत अपने नागरिकों पर हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और हर हमले का जवाब देगा।

जख्म अभी भी ताजा

इस हमले में किसी ने अपना जीवनसाथी खोया, तो किसी ने अपने परिवार का इकलौता सहारा। एक साल बाद भी उन परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। यादें आज भी दिलों को चीर देती हैं। पहलगाम की यह बरसी सिर्फ शोक का दिन नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का भी वक्त है कि आतंक के खिलाफ देश की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

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