Parliament protests India: संसद भवन परिसर में मंगलवार को अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा किए गए तीन विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। आमतौर पर विपक्ष किसी बड़े मुद्दे पर एकजुट होकर प्रदर्शन करता है, लेकिन इस दिन अलग-अलग दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर अलग-अलग स्थानों पर विरोध दर्ज कराते नजर आए। संसद परिसर में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामदलों के सांसदों ने तीन अलग मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कांग्रेस का निलंबित सांसदों के समर्थन में प्रदर्शन
पहला विरोध प्रदर्शन कांग्रेस सांसदों की ओर से किया गया। यह प्रदर्शन बजट सत्र के पहले चरण से ही जारी है। कांग्रेस के वे सांसद जिन्हें लोकसभा से निलंबित किया गया है, वे रोजाना संसद के मकर द्वार के पास धरना देते दिखाई देते हैं।
निलंबित सांसद लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकते, इसलिए वे संसद की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध जताते हैं। उनका कहना है कि निलंबन अनुचित है और वे इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे। यह प्रदर्शन अब लगभग रोजमर्रा का हिस्सा बन गया है, जहां निलंबित सांसद संसद भवन के बाहर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराते हैं और सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाते हैं।
आलू के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन
दूसरा विरोध प्रदर्शन समाजवादी पार्टी के सांसदों द्वारा किया गया। इस प्रदर्शन में सपा सांसदों ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान सांसदों के हाथों में आलू दिखाई दे रहे थे और वे “सस्ता आलू, महंगा बालू” जैसे नारे लगा रहे थे। उनका कहना था कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
इस प्रदर्शन में सांसद डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, प्रिया सरोज और इकरा हसन सहित अन्य सपा सांसद भी शामिल थे। सांसदों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर किसानों के समर्थन में संदेश लिखे हुए थे। किसी तख्ती पर लिखा था कि आलू का उचित मूल्य दिलाओ और किसानों को बचाओ, जबकि दूसरी तख्ती पर किसानों को मत सताओ जैसे नारे लिखे थे।
सांसद इकरा हसन के हाथ में जो पोस्टर था, उस पर लिखा था कि आलू किसान की सुध ले सरकार, उनका जीवन हो रहा बर्बाद। वहीं प्रिया सरोज के पोस्टर में लिखा था कि आलू किसान कर रहे पुकार, उनकी पीड़ा नहीं सुनती सरकार। सपा सांसदों का आरोप था कि सरकार किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने में विफल रही है।
महंगाई के खिलाफ वामदलों और आरजेडी का प्रदर्शन
संसद परिसर में तीसरा प्रदर्शन वामदलों और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसदों ने किया। उनका मुख्य मुद्दा बढ़ती महंगाई था। सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। एक पोस्टर पर लिखा था, “तेल हुआ महंगा, गैस हुई भारी, कहां छुपी है मोदी सरकार।” एक अन्य तख्ती में लिखा था, “जंग ट्रंप की, महंगाई जनता की, मोदी सरकार चुप क्यों?” इन सांसदों का आरोप था कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में असफल रही है और आम जनता पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अलग-अलग मुद्दों पर अलग विरोध
मंगलवार को संसद परिसर में हुए इन तीन अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहे हैं। जहां कांग्रेस सांसदों का प्रदर्शन निलंबन के विरोध में था, वहीं समाजवादी पार्टी ने किसानों के मुद्दे को उठाया और वामदलों तथा आरजेडी ने महंगाई को लेकर सरकार को घेरा।

