Impeachment Notice: भारत की संसदीय राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है। पहली बार देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए नोटिस तैयार कर लिया है और बताया जा रहा है कि करीब 193 से अधिक सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यह नोटिस संसद के किसी एक सदन में जल्द ही पेश किया जा सकता है। इस पहल का नेतृत्व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी कर रही हैं, जिसे कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है।
200 के करीब सांसदों का समर्थन
मिली जानकारी के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। बताया जा रहा है कि लोकसभा के लगभग 130 सांसदों और राज्यसभा के 60 से अधिक सांसदों ने इस पर अपनी सहमति दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि आवश्यक संख्या पूरी हो जाने के बाद भी कई सांसदों ने समर्थन जताते हुए नोटिस पर हस्ताक्षर किए। संभावना जताई जा रही है कि यह प्रस्ताव संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान ही पेश किया जा सकता है।
महाभियोग लाने के नियम क्या हैं?
भारतीय संविधान के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है, जो सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने के लिए अपनाई जाती है।
इस प्रक्रिया के तहत-
• लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
• राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।
इसके बाद नोटिस संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
• सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत
• उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत
CEC पर लगाए गए 5 बड़े आरोप
सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप।
- चुनावी अनियमितताओं की जांच में जानबूझकर बाधा डालने का दावा।
- बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप।
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप।
- केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को चुनावी लाभ पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप।
इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के साथ बैठकों के दौरान पार्टी नेताओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।
SIR प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्ति
विपक्षी दल लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष रूप से इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
कैसे आगे बढ़ेगी महाभियोग प्रक्रिया?
यदि संसद में नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है, तो आगे की प्रक्रिया न्यायिक जांच की तरह होती है। दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद एक विशेष जांच समिति का गठन किया जाता है। इस समिति में आम तौर पर:
• सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या कोई न्यायाधीश
• किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
• एक प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
यह समिति आरोपों की जांच करती है और गवाहों तथा संबंधित पक्षों से पूछताछ करती है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है।
संसद में कब होगी चर्चा?
नियमों के अनुसार, नोटिस पेश होने के 14 दिनों बाद इस पर संसद में चर्चा की जाती है। इस समय संसद का बजट सत्र जारी है, जो 2 अप्रैल तक चलने वाला है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इसी सत्र में यह महाभियोग प्रस्ताव आगे बढ़ पाता है या नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से संसद में पेश होता है, तो यह भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटना होगी। अब देखना होगा कि संसद में इस मुद्दे पर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है।
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