Police Law : पुलिसकर्मी के अधिकार और नागरिकों की सुरक्षा के संबंध में जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि पुलिसकर्मी किसी भी परिस्थिति में उनके साथ जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कानून हर नागरिक को समान अधिकार देता है। BNS धारा 115 के अनुसार, कोई भी पुलिसकर्मी बिना किसी उचित कारण के किसी नागरिक को थप्पड़ मारने या मारपीट करने का अपराध कर रहा है। इस अपराध के दोषी पुलिसकर्मी को एक वर्ष की जेल या ₹10,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि पुलिस और आम नागरिक के बीच किसी भी प्रकार का असंवैधानिक व्यवहार कानूनी दंड के दायरे में आता है।
आवश्यक जानकारी :~
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कोई भी पुलिसकर्मी बिना कारण आपको न तो थप्पड़ मार सकता है और न ही मारपीट कर सकता है। ऐसा करना BNS धारा 115 के तहत अपराध है। इसमें दोषी पुलिसकर्मी को 1 साल की जेल या ₹10,000 जुर्माना हो सकता है।ध्यान रखें,
कानून सबके लिए बराबर है – चाहे आम…— NCIB Headquarters (@NCIBHQ) August 17, 2025
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो ने दी जानकारी
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो जानकारी दी है। अगर किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की घटना होती है, तो सबसे पहले उन्हें नजदीकी पुलिस थाना जाकर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ FIR दर्ज करानी चाहिए। FIR दर्ज करना एक कानूनी प्रक्रिया है, जो नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने का पहला कदम माना जाता है। इसके साथ ही, तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 100 या आपात हेल्पलाइन 112 पर कॉल करना चाहिए। यह कॉल रिकॉर्ड होती है और भविष्य में इसे कानूनी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कदम न केवल तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह घटना के सही दस्तावेजीकरण में भी सहायक होता है।
नागरिकों को यह अधिकार
यदि स्थानीय थाना FIR दर्ज करने में आनाकानी करता है, तो नागरिकों को यह अधिकार है कि वे जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक या मानवाधिकार आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। ऐसे मामलों में उच्च अधिकारियों से शिकायत करना आवश्यक है, क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होता है कि दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और भविष्य में किसी अन्य नागरिक के साथ ऐसे व्यवहार की संभावना कम हो।
कोर्ट का भी सहारा ले सकते हैं पीड़ित
इसके साथ ही, जरूरत पड़ने पर नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का सहारा भी ले सकते हैं। न्यायालय में याचिका दायर करके दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। यह कदम नागरिकों को यह सशक्त संदेश देता है कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के खिलाफ कानूनी रास्ता हमेशा खुला है और न्याय पाने का अधिकार हर व्यक्ति को है। यह स्पष्ट है कि पुलिसकर्मी भी कानून के दायरे में काम करता है और नागरिकों के खिलाफ किसी भी प्रकार का हिंसात्मक या असंवैधानिक व्यवहार अपराध माना जाता है। BNS धारा 115 इस बात को कानूनी रूप से सुनिश्चित करती है और नागरिकों को यह अधिकार देती है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा करें।
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