New GST Reform : केंद्र सरकार ने माल और सेवा कर (GST) प्रणाली में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है, जिससे टैक्स ढांचा अधिक सरल, पारदर्शी और उपभोक्तामुखी बनेगा। इस अगले-जीन सुधार के अंतर्गत GST को मुख्यतः दो प्रमुख स्लैब 5% और 18% तक सीमित किए जाने का प्रस्ताव है, साथ ही “तंबाकू या लग्ज़री” वस्तुओं के लिए 40% की भारी टैक्स रेट लगाने का प्रस्ताव है।
क्या-क्या स्लैब होंगे?
5% स्लैब: शिक्षा, स्वास्थ्य (दवाइयां, चिकित्सा उपकरण), बीमा, कृषि उपकरण, दैनिक-उपयोग की वस्तुएं जैसे जरूरतमंद सेवाएं। यह स्लैब आदर्श रूप से 12% की वर्तमान दर में शामिल लगभग 99% वस्तुओं के लिए लागू होगा ।
18% स्लैब: टीवी, एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मोटर वाहन, होटल सेवाएं, फैशन आदि वस्तुएं जो वर्तमान में 28% दर में हैं, उनमें से लगभग 90-99% इसमें शामिल हो सकती हैं ।
40% स्लैब: तंबाकू, पान मसाला या लग्ज़री वस्तुएं यह दर केवल 5–7 वस्तुओं पर लागू की जाएगी, ताकि उनकी खपत में कमी आए और स्वास्थ्य जोखिम को नियंत्रण में रखा जाए ।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परिवर्तन?
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजमर्रा की वस्तुओं पर कर कमी से आम आदमी पर आर्थिक बोझ कम होगा, और MSMEs को व्यापार में सहूलियत मिलेगी। रणनीतिक रूप से दीपावली से पहले लागू किए जा रहे इस सुधार से मांग और खपत में बढ़ोत्तरी की उम्मीद है, जिससे आर्थिक गतिविधियाँ गति पकड़ सकती हैं ।
किन चीजों पर है GSTसे छूट
पेट्रोलियम उत्पाद, पहले की तरह GST व्यवस्था से बाहर रहेंगे. हीरे (0.25%) और सोना या चांदी जैसी वस्तुओं पर 3 फीसदी टैक्स अपरिवर्तित रहेंगा। इस बीच कपड़ा और उर्वरकों के लिए सुधार का प्रस्ताव किया गया है।
अगला कदम क्या है?
Finance Ministry ने यह प्रस्ताव तीन अलग-अलग Groups of Ministers (GoMs) को भेजा है। इनमें शामिल हैं दरों की समीक्षा, मुआवज़ा ढांचा और बीमा से सम्बंधित समूह। इनके सुझाव के बाद, GST परिषद इस प्रस्ताव पर चर्चा करेगा और संभवतः सितंबर या अक्टूबर में इसे अंतिम रूप देंगे, जिससे दीपावली तक नए स्लैब लागू हो सके।
ये भी पढ़े : देशभर में लागू हुआ FASTag Annual Pass : अब मिलेगी सालभर टोल से राहत, पहले ही दिन इतने लोगों ने खरीदा यह पास
प्रस्तावित GST सुधार न सिर्फ टैक्स ढांचे को सरल बनाता है, बल्कि आम जनता, किसानों, छात्रों, MSMEs, और उद्योगों को राहत पहुंचाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कर दर को 5% तक घटाए जाने से समाज में सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया गया है।

