Today Weather Update: दिल्ली और आसपास के इलाकों में शनिवार की सुबह लोगों को एक हैरान कर देने वाला नज़ारा देखने को मिला। जहां आमतौर पर मार्च के आखिर तक गर्मी का असर तेज़ होने लगता है, वहीं इस बार मौसम ने पूरी तरह अलग ही रुख दिखाया। कभी हल्की धूप, कभी घना कोहरा और कहीं बादलों की छांव मानो मौसम ने एक साथ कई रंग दिखा दिए हों।
आखिर अचानक कोहरा कैसे छा गया?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस असामान्य बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ का बड़ा हाथ है। इस सिस्टम के सक्रिय होने से हवा में नमी का स्तर काफी बढ़ गया है। पिछले दिनों हुई बारिश ने वातावरण को और भी ज्यादा नम बना दिया, जिसके कारण सुबह के समय कोहरे और धुंध की स्थिति बन गई।
हवा की धीमी रफ्तार और तापमान का असर
शनिवार सुबह तापमान करीब 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि दिन में यह 28 से 30 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। रात की ठंडक, हवा में 70% से अधिक नमी और 5 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी पूर्वी हवाओं ने मिलकर नमी को जमीन के करीब ही रोक दिया। यही नमी संघनित होकर धुंध और हल्के कोहरे में बदल गई।
धूल, नमी और प्रदूषण का ‘मिश्रण’
यह धुंध सिर्फ नमी का नतीजा नहीं है।
मौसम में मौजूद नमी के कारण हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण पानी को सोखकर बड़े हो गए, जिससे उनकी मात्रा और प्रभाव दोनों बढ़ गए। इसके साथ ही ऊपरी हवाएं थार रेगिस्तान और बलूचिस्तान से धूल के कण भी लेकर आ रही हैं। इन सबका संयुक्त असर इस धुंध को और घना बना रहा है।
क्या यह खतरनाक स्मॉग है?
अक्सर दिल्ली में धुंध देखते ही प्रदूषण की चिंता बढ़ जाती है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार यह स्थिति खतरनाक स्मॉग नहीं बल्कि सामान्य मौसमीय धुंध है, जो नमी और मौसम के बदलाव के कारण बनी है। हालांकि, दृश्यता कम होने से थोड़ी असुविधा जरूर हो सकती है।
पहाड़ों में बर्फबारी का असर
इस पूरे मौसम के खेल के पीछे एक और कारण है, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता। इसके चलते उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हो रही है। यही वजह है कि मैदानी इलाकों में भी बादल, धुंध और हल्की ठंड का असर बना हुआ है। दिन का तापमान सामान्य से लगभग 4 से 6 डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है, जिससे गर्मी का एहसास फिलहाल टल गया है।
मौसम का अनोखा मिश्रण
मार्च के अंत में जहां तेज गर्मी का असर दिखना चाहिए था, वहीं इस बार मौसम ने एक अनोखा खेल रचा है की कहीं बारिश, कहीं धूप, कहीं कोहरा और कहीं बादलों की परत। यह बदलाव न केवल दिलचस्प है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रकृति कितनी अप्रत्याशित और रहस्यमयी हो सकती है।
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