Supreme Court Decision: SC/ST आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में बहस तेज हो गई है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर सिस्टम लागू करने की मांग की गई है। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिका में तर्क दिया गया है कि यदि SC/ST वर्ग के किसी परिवार में एक सदस्य सरकारी या संवैधानिक पद प्राप्त कर लेता है, तो उसके बच्चों को आगे आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में आरक्षण का फायदा उन्हीं परिवारों को बार-बार मिल रहा है, जबकि वास्तव में जरूरतमंद लोग इससे वंचित रह जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और नोटिस
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए सभी सरकारों से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाया गया सवाल सामाजिक न्याय से जुड़ा है और इस पर सभी पक्षों की राय जरूरी है।
क्या आरक्षण का उद्देश्य पूरा हो रहा है?
याचिका में कहा गया है कि आरक्षण का मूल उद्देश्य समाज के सबसे वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पा रहा है। पहले से सशक्त हो चुके परिवार ही बार-बार इसका लाभ उठा रहे हैं।
पहले भी उठ चुका है क्रीमी लेयर का मुद्दा
गौरतलब है कि इससे पहले भी पूर्व CJI बी. आर. गवई की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने SC/ST वर्ग में क्रीमी लेयर को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। अब सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आई है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि क्या SC/ST आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू होगी या नहीं। यह फैसला देश की आरक्षण नीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकता है।
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