National Space Day 2025 : भारत आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है। यह वही दिन है जब दो साल पहले, 23 अगस्त 2023 को, चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की थी। यह उपलब्धि भारत को उस क्षेत्र में उतरने वाला पहला और चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना गई। इसी अद्वितीय उपलब्धि की स्मृति में इस दिन को हर वर्ष राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है।
2025 की थीम
“आर्यभट्ट से गगनयान: प्राचीन ज्ञान से अनंत संभावनाओं तक” यह भारत की प्राचीन खगोल विज्ञान परंपरा और आने वाले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के बीच के विकास को दर्शाता है।
इसरो की यात्रा, साइकिल से अंतरिक्ष तक
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कहानी केवल तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि दृढ़ता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। शुरुआती दौर में रॉकेट के हिस्से साइकिल और बैलगाड़ियों पर ढोकर लॉन्च स्थल तक पहुंचाए गए। भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट (1975) छोटे से गांव में तैयार किया गया था। 1981 में एप्पल उपग्रह को परीक्षण के लिए बैलगाड़ी से ले जाया गया, ताकि धातु की गाड़ियां सिग्नल में बाधा न डालें।
इसरो के 11 अनकहे तथ्य
- तिरुवनंतपुरम के सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च से रॉकेट परीक्षण शुरू हुए, जिसे बाद में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र नाम दिया गया।
- 2014 में मंगलयान पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंच गया, ऐसा करने वाला भारत पहला देश था।
- 2017 में एक ही प्रक्षेपण में 104 उपग्रह छोड़कर इसरो ने इतिहास रच दिया।
- इसरो के मिशन इतने लागत-कुशल हैं कि चार दशकों में खर्च, नासा के मात्र छह महीनों के बराबर है।
- इसरो के हार्डवेयर पर तीन क्षैतिज रेखाओं का चिन्ह होता है, जो परंपरा और संकल्प का प्रतीक है।
- इसरो ने भुवन नामक 3डी सैटेलाइट मैपिंग प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया, जिसे भारत का गूगल अर्थ कहा जाता है।
- पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी सुपार्को 1961 में बनी थी, लेकिन अब तक केवल 2 उपग्रह लॉन्च कर सकी है, जबकि इसरो 86 से अधिक कर चुका है। इसरो ने
- अपनी क्षमताओं के मामले में अपने पड़ोसी को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
- दोनों एजेंसियों का संयुक्त NISAR मिशन जलवायु और आपदा प्रबंधन में क्रांति लाने वाला है।
- इसरो छात्रों द्वारा डिजाइन किए उपग्रहों को भी प्रक्षेपित करता है।
- इसरो के सैटेलाइट बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं में राहत कार्यों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी प्रदान करते हैं।
- उपग्रहों से टेलीमेडिसिन, दूरस्थ शिक्षा और संचार सेवाएं भारत के सबसे सुदूर इलाकों तक पहुँचती हैं।
भविष्य की ओर कदम
आदित्य-एल1 मिशन सूर्य का अध्ययन कर जलवायु अनुसंधान को नई दिशा दे रहा है। आने वाला गगनयान मिशन भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान होगी। छात्र-आधारित इनोवेशन और ग्रामीण कनेक्टिविटी इसरो के कार्यों को ज़मीन से अंतरिक्ष तक जोड़ते हैं।
ये भी पढ़े : चंद्रमा पर किसका अधिकार? भारत की अनूठी स्थिति से जवाब की उम्मीद
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस केवल एक दिन का जश्न नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक सोच, तकनीकी उत्कृष्टता और आत्मनिर्भरता की पहचान है। आर्यभट्ट से लेकर गगनयान तक की यह यात्रा दिखाती है कि कैसे भारत ने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर आज वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।

