Crude Oil Price Surge: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को अचानक उछाल दिया है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस भू-राजनीतिक तनाव के प्रभाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमत को $69.01 प्रति बैरल से बढ़ाकर 9 मार्च तक $120 प्रति बैरल तक पहुंचा दिया। इस उछाल के बावजूद आम जनता और निवेशकों के लिए राहत की खबर यह है कि भारत में फिलहाल महंगाई पर इसका कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी
फरवरी के अंत तक भारतीय बास्केट के तेल की कीमत $69.01 थी, जो 2 मार्च तक $80.16 प्रति बैरल तक बढ़ गई। वहीं सोमवार को वैश्विक बाजार में कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुँच गईं। रुपये की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण रही, डॉलर के मुकाबले रुपया 53 पैसे कमजोर होकर 92.35 रुपये पर पहुंचा। ध्यान रहे कि एक बैरल में लगभग 158.987 लीटर तेल होता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भरोसेमंद बयान
लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारत की महंगाई दर इस समय बेहद निचले स्तर पर है। इसके कारण कच्चे तेल में आई इस तेजी का फिलहाल आम आदमी पर कोई बड़ा असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लगातार घटती हुई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) ने देश में महंगाई को काबू में रखा है।
उदाहरण के लिए-
• 2023-24 में औसत खुदरा महंगाई दर 5.4% थी।
• 2024-25 में यह घटकर 4.6% हो गई।
• 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में महज 1.8% पर पहुंच गई।
आरबीआई की नीतियां और मौद्रिक राहत
जनवरी 2026 में हेडलाइन महंगाई दर 2.75% रही, जो रिजर्व बैंक के 4% ± 2% टॉलरेंस बैंड के सबसे निचले स्तर के करीब है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने फरवरी 2025 से अब तक पॉलिसी रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है।
आम जनता को राहत देने के लिए सरकार के कदम
सरकार ने महंगाई पर असर कम करने और आम नागरिकों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- टैक्स में छूट: सालाना 12 लाख रुपये तक की आय को इनकम टैक्स से मुक्त किया गया, नौकरीपेशा लोगों के लिए सीमा 12.75 लाख रुपये।
- सस्ती वस्तुएं: वस्तु एवं सेवा कर (GST) दरों में व्यापक कटौती कर आवश्यक वस्तुओं को किफायती बनाया।
- खाद्य सुरक्षा: अनाज का बफर स्टॉक बढ़ाया गया, जरूरत पड़ने पर आयात को आसान और निर्यात पर रोक लगाई।
आगे का परिदृश्य
आरबीआई की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10% की वृद्धि होती है और इसका पूरा बोझ घरेलू बाजार पर डाला जाता है, तो भी महंगाई दर में केवल 0.30% (30 बेसिस पॉइंट्स) की ही बढ़ोतरी होगी। हालांकि, मध्यम अवधि में महंगाई पर असर कई कारकों पर निर्भर करेगा, जैसे कि-
• विदेशी मुद्रा दर की चाल
• वैश्विक मांग और आपूर्ति का संतुलन
• मौद्रिक और वित्तीय नीतियां
वित्त मंत्री का कहना है कि मजबूत आर्थिक नीतियों और तैयारियों के कारण भारत फिलहाल इस वैश्विक तेल संकट से सुरक्षित है।
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