India Oil : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि भारत बहुत जल्द रूस से तेल खरीदना कम कर देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदने की प्रक्रिया को धीरे-धीरे समाप्त करेगा। ट्रंप के इस बयान के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में हलचल तेज हो गई है।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत
ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। यह तुरंत संभव नहीं है, लेकिन यह प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो रूस-यूक्रेन युद्ध में संघर्ष विराम लाने की कोशिशों को बल मिलेगा। उनके मुताबिक, युद्ध समाप्त होने के बाद भारत चाहे तो फिर से रूस से तेल ले सकता है।
भारत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं
भारत सरकार की ओर से फिलहाल ट्रंप के इस दावे की कोई पुष्टि नहीं की गई है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और वह किसी तीसरे देश के दबाव में आकर निर्णय नहीं लेता। भारत का तर्क है कि रूस से सस्ता तेल खरीदना देश की ऊर्जा सुरक्षा और मूल्य स्थिरता के लिए आवश्यक है।
भीरत और तेल के आंकड़ों से क्या झलकता है?
- अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच रूस से तेल आयात में लगभग 8.4% की गिरावट दर्ज हुई।
- प्रतिदिन तेल खरीद का आकड़ा अगस्त की तुलना में 70 हजार बैरल अधिक था।
- मूल्य के लिहाज से, भारत ने सितंबर में रूस से करीब ₹25,597 करोड़ (2.5 बिलियन डॉलर) का तेल आयात किया।
- कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 34% रही, जो जून में 36% थी।
- इसके अलावा, सरकारी ऊर्जा कंपनियों ने जून से सितंबर के बीच रूस से तेल खरीद में 45% तक कटौती की है। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह फैसला पश्चिम एशिया और अमेरिका से बढ़ते सौदों के चलते हुआ है, न कि ट्रंप प्रशासन के किसी दबाव में।
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