Justice Yashwant Varma case : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए एक जांच कमेटी गठित की है. जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 146 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेता शामिल हैं.
प्रस्ताव पर कुल 146 सांसदों का हस्ताक्षर
स्पीकर ओम बिरला द्वारा गठित जांच कमेटी में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के एक-एक न्यायमूर्ति शामिल किए गए हैं. इसके अलावा, एक वरिष्ठ कानून विशेषज्ञ को भी कमेटी का हिस्सा बनाया गया है. कमेटी की रिपोर्ट आने तक महाभियोग प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा. इस जांच कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट बीबी आचार्य और मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को शामिल किया गया है.
जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोप
महाभियोग प्रस्ताव लाने के पीछे की वजह जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में मार्च 2023 में लगी आग है. दिल्ली में तब मौजूद जस्टिस वर्मा के घर में आग लगने के बाद जब फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां से चौंकाने वाली चीजें सामने आईं. जस्टिस वर्मा के स्टोर रूम से 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल मिले थे, जो बोरे में रखे गए थे. इस घटना ने कई सवाल खड़े किए, और आरोप लगाया गया कि जस्टिस वर्मा के पास बड़ी मात्रा में नकद राशि थी, जो अवैध तरीके से जमा की गई थी.
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हालांकि,जस्टिस वर्मा ने इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि उनके घर या स्टोर में कोई नकदी नहीं थी और वे इस मामले में साजिश का शिकार हो रहे हैं.
जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर
इस विवाद के बाद, 28 मार्च 2023 को जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया था. इस कदम से यह साफ हो गया था कि उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन पर कार्रवाई करने का फैसला किया.
महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया
महाभियोग प्रस्ताव किसी उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए लाया जा सकता है. इसे संसद के दोनों सदनों में से किसी एक में पेश किया जाता है. फिर इस प्रस्ताव की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया जाता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज, उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस और विधि विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है.
लोकसभा स्पीकर की ओर से बनाई गई कमेटी अब इस मामले की गहन जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

