Importance Of Census: भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले देश में जनगणना का विशेष महत्व है। जनगणना एक आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया होती है, जिसमें देश के हर व्यक्ति से जुड़ी बुनियादी जानकारी एकत्र की जाती है। इसके अंतर्गत यह पता लगाया जाता है कि देश में कुल जनसंख्या कितनी है, लोग किस राज्य, शहर या गांव में रहते हैं, उनकी उम्र, शिक्षा स्तर, रोजगार और पारिवारिक स्थिति क्या है। जनगणना का मुख्य उद्देश्य देश की वास्तविक जनसंख्या स्थिति को समझना होता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि बीते वर्षों में जनसंख्या में कितना इजाफा हुआ है और समाज में किस तरह के सामाजिक और आर्थिक बदलाव आए हैं। जनगणना के आंकड़े सरकार के लिए देश की स्थिति को समझने का सबसे भरोसेमंद आधार होते हैं।
सरकारी योजनाओं और विकास के लिए जनगणना का महत्व
सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सभी बड़ी योजनाओं की नींव जनगणना के आंकड़ों पर टिकी होती है। जब सरकार को यह जानकारी होती है कि किस क्षेत्र में कितने लोग रहते हैं और वहां बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या कितनी है, तब उसी अनुसार योजनाएं बनाई जाती हैं। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी सुविधाओं का विकास जनगणना के आधार पर किया जाता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जरूरतें अलग होती हैं, और जनगणना इन जरूरतों को सही तरीके से पहचानने में मदद करती है। राशन वितरण, स्वास्थ्य योजनाएं और रोजगार से जुड़ी योजनाएं भी जनसंख्या आंकड़ों के बिना प्रभावी नहीं हो सकतीं।
राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में जनगणना की क्या है भूमिका
जनगणना का महत्व केवल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर भी पड़ता है। लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है, ताकि हर क्षेत्र को उसकी जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके अलावा आरक्षण व्यवस्था, सामाजिक कल्याण योजनाएं और कमजोर वर्गों के लिए बनाई जाने वाली नीतियां भी जनगणना पर निर्भर करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े फैसले लेते समय सरकार इन्हीं आंकड़ों का सहारा लेती है। जनगणना यह तय करने में मदद करती है कि समाज के किस वर्ग को अधिक सहायता की आवश्यकता है।
भविष्य की योजना और देश के संतुलित विकास में जनगणना का महत्व
जनगणना केवल वर्तमान स्थिति को नहीं दर्शाती, बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए भी मार्गदर्शन करती है। इसके आंकड़ों से यह अनुमान लगाया जाता है कि आने वाले वर्षों में जनसंख्या कितनी बढ़ सकती है और संसाधनों की मांग कैसी होगी। अर्थशास्त्री, शोधकर्ता और नीति-निर्माता जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करके देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करते हैं। इससे रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं की भविष्य की जरूरतों को समझा जाता है।
कुल मिलाकर, जनगणना भारत के संतुलित विकास, सामाजिक समानता और मजबूत भविष्य की दिशा तय करने वाली एक बेहद जरूरी प्रक्रिया है।
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