Delhi High Court : दिल्ली हाईकोर्ट में इन दिनों एक अनोखा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला किसी संपत्ति या व्यापार से जुड़ा नहीं, बल्कि एक पालतू रॉटविलर कुत्ते की कस्टडी को लेकर है।
मामला क्या है?
TMS सांसद महुआ मोइत्रा और वकील जय अनंत देहाद्राई करीब तीन साल तक रिलेशनशिप में रहे। रिश्ता खत्म होने के बाद दोनों के बीच उनके पालतू कुत्ते को लेकर विवाद खड़ा हो गया। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली की साकेत जिला अदालत में एक सिविल सूट दायर कर कुत्ते की संयुक्त कस्टडी की मांग की थी। वहीं, दोनों ने एक-दूसरे पर कुत्ता “चुराने” के आरोप भी लगाए।
देहाद्राई का कहना है कि मामले पर खुलकर बोलने से रोक
मार्च 2025 में साकेत कोर्ट ने एक आदेश जारी कर कहा था कि मामले की कार्यवाही और उससे जुड़ी बातें सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की जाएं। इस आदेश को जय अनंत देहाद्राई ने चुनौती दी और Delhi High Court का दरवाजा खटखटाया। देहाद्राई का कहना है कि यह आदेश उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का उल्लंघन है, क्योंकि इससे उन्हें मामले पर खुलकर बोलने से रोका जा रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा ये बाहर क्यों नहीं निपटाया जा सकता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनोज जैन ने दोनों पक्षों को सुझाव दिया कि वे अदालत का समय और संसाधन खर्च करने के बजाय आपसी सहमति से इस मामले को सुलझाएं। जज ने पूछा, “आखिर कुत्ते की कस्टडी का विवाद अदालत के बाहर क्यों नहीं निपटाया जा सकता?”
अदालत ने इस मामले में महुआ मोइत्रा से जवाब भी मांगा है। वहीं, देहाद्राई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय घोष ने कहा कि महुआ के मुकदमे में साफ तौर पर कुत्ते की संयुक्त देखभाल (Joint Custody) की मांग की गई है।
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कस्टडी विवाद आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय
अब हाईकोर्ट इस याचिका पर सुनवाई जारी रखेगा। फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से हल निकालने की सलाह दी है। यह मामला न केवल कानूनी हलकों में बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह “कस्टडी विवाद” किसी बच्चे या संपत्ति का नहीं बल्कि एक पालतू कुत्ते का है।

