Janmashtami 2025 : गुजरात के द्वारका स्थित प्रसिद्ध जगत मंदिर में इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और पारंपरिक तरीके से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी का पर्व शनिवार, 16 अगस्त 2025 को है और इसके लिए मंदिर प्रशासन, नगर पालिका और पुलिस विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। अनुमान है कि इस उत्सव में देश-विदेश से आए दो लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मंदिर परिसर फूलों, रंग-बिरंगी झालरों तैयार
मंदिर प्रशासन के अनुसार, जगत मंदिर को आकर्षक और कलात्मक लाइटिंग से सजाया गया है। इसके साथ ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और दीयों से सजाकर भक्तिमय वातावरण तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं के बैठने और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर परिसर में एक विशाल मंडप बनाया गया है। प्रवेश और निकास के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को छप्पन सीढ़ियों वाले स्वर्ग द्वार से प्रवेश कराया जाएगा, जबकि निकास मोक्ष द्वार से होगा। इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एकतरफा प्रवेश और निकास प्रणाली लागू की गई है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
पुलिस बल के साथ-साथ बड़ी संख्या में होमगार्ड तैनात
श्रद्धालुओं के आवागमन को सहज बनाने के लिए यातायात पुलिस ने कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किए हैं। देवस्थान समिति ने पार्किंग की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली है और वाहनों की सुविधा के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस बल के साथ-साथ बड़ी संख्या में होमगार्ड भी तैनात किए गए हैं। मेडिकल टीम और एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गई है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। नगर पालिका की ओर से साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए गए हैं और आसपास के क्षेत्रों में पानी, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इस बार उन श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है जो किसी कारणवश द्वारका नहीं पहुंच पाएंगे। मंदिर प्रशासन ने जन्माष्टमी उत्सव का लाइव ऑनलाइन प्रसारण कराने की योजना बनाई है, ताकि देश-विदेश के भक्त घर बैठे भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर सकें और आरती का लाभ उठा सकें।
‘महाभिषेक’ भी किया जाएगा
जन्माष्टमी महोत्सव में सिर्फ पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भक्ति कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। भजन संध्या, कीर्तन, नृत्य-नाटिका और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी आकर्षण का केंद्र होंगी। मध्यरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की विशेष आरती होगी और परंपरा के अनुसार ‘महाभिषेक’ किया जाएगा। इस अवसर पर पूरे मंदिर में घंटों, शंख और भजनों की गूंज से माहौल भक्तिमय बन जाएगा। द्वारका नगरी को भगवान श्रीकृष्ण की राजधानी कहा जाता है और यहां जन्माष्टमी का उत्सव हर साल विशेष महत्व रखता है। स्थानीय नागरिक भी मंदिर प्रशासन की तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं। दुकानों और घरों को सजाया गया है तथा जगह-जगह भजन मंडलियां और झांकियां सजाई जा रही हैं।
कुल मिलाकर, द्वारकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी का यह पर्व आस्था, भक्ति और उल्लास का संगम बनकर सामने आने जा रहा है। लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनेंगे और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अलौकिक झलक अपने जीवन में संजोकर घर लौटेंगे।
ये भी पढ़े : Janmashtami 2025 : अगर भूल से टूट जाए जन्माष्टमी का व्रत तो न हों परेशान, इन उपायों से मिलेगी श्रीकृष्ण की असीम कृपा

