Google Map Becomes Fatal: लद्दाख की खूबसूरत वादियों की सैर चार दोस्तों के लिए जिंदगी और मौत की जंग में बदल गई। गूगल मैप के सहारे सफर कर रहे युवकों की कार बर्फीले रास्ते पर फिसलकर करीब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी। कड़ाके की ठंड, सुनसान इलाका और सीमित संसाधन—हर पल मौत करीब थी। लेकिन हौसले और किस्मत ने साथ दिया और कई दिनों बाद चारों सुरक्षित घर लौट आए।
कैसे हुआ हादसा?
आगरा के सदर क्षेत्र निवासी जयवीर, शिवम, यश मित्तल और सुधांशु 6 जनवरी को लद्दाख घूमने निकले थे। श्रीनगर के रास्ते लद्दाख पहुंचने के बाद उन्होंने 9 जनवरी को पैंगोंग झील का रुख किया। लौटते वक्त लेह-मनाली मार्ग पर भारी बर्फबारी हो रही थी। सड़क पर जमी बर्फ से फिसलन बढ़ गई और अचानक कार नियंत्रण से बाहर होकर खाई में गिर गई। गनीमत रही कि चारों की जान बच गई, लेकिन कार बुरी तरह फंस गई। मोबाइल नेटवर्क नहीं था और आसपास दूर-दूर तक कोई बस्ती नजर नहीं आ रही थी।
माइनस 20 डिग्री में मौत से मुकाबला
रात होते-होते तापमान माइनस 20 डिग्री तक पहुंच गया। ठंड से बचने के लिए चारों एक साथ रहे और पास ही एक झोपड़ी में शरण ली। खाने-पीने का सामान सीमित था। कुछ दिनों बाद गैस और राशन खत्म होने लगा। पानी खत्म होने पर उन्होंने बर्फ को पिघलाकर पीना शुरू किया। कार में मौजूद डीजल भी दो दिन में खत्म हो गया, जिसके बाद उन्हें पैदल निकलने का फैसला करना पड़ा। हर कदम पर जान का खतरा था, लेकिन लौटने की उम्मीद ने उन्हें आगे बढ़ाए रखा।
‘HELP’ लिखकर मांगी मदद
शिवम ने परिजनों को बताया कि शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि कोई वाहन या राहगीर मदद के लिए आ जाएगा। जब कोई नहीं दिखा, तो कागजों पर “HELP” लिखकर पेड़ों और पत्थरों पर लगा दिया। आसमान से गुजरते हेलिकॉप्टर को देखकर लाल कपड़ा भी लहराया, लेकिन मदद नहीं मिली। कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद आखिरकार उनकी मुलाकात बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के जवानों से हुई। जवानों ने उन्हें अपनी झोपड़ी में ठहराया और फिर पुलिस को सूचना दी गई।
13 जनवरी को मिली जिंदगी की खबर
13 जनवरी को चारों युवक पुलिस को मिले। मेडिकल जांच के बाद उन्हें सुरक्षित बताया गया। गुरुवार रात करीब 8:30 बजे वे परिजनों के साथ आगरा पहुंचे। बच्चों को देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे। शिवम के ममेरे भाई जयपाल सिंह चौधरी ने बताया कि चारों दोस्त अपनी कार से गए थे और साथ में चूल्हा, गैस सिलिंडर और खाने का सामान भी लेकर चले थे। लेकिन गूगल मैप के सहारे चलते हुए वे मुख्य मार्ग से भटक गए और सुनसान रास्ते पर फंस गए।
परिवार ने ऐसे काटे डर के दिन
परिजनों के मुताबिक, बच्चों से संपर्क टूटने के बाद हर दिन भारी गुजर रहा था। तलाश में परिवार के आठ लोग खुद भी निकल पड़े थे। पुलिस से फोन पर उनके सुरक्षित होने की खबर मिली, तब जाकर सभी को राहत मिली।
एक सबक भी छोड़ गई यह कहानी
यह घटना रोमांचक यात्रा की चाह रखने वालों के लिए बड़ी चेतावनी है। लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में सिर्फ गूगल मैप के भरोसे सफर करना खतरनाक हो सकता है। सही जानकारी, स्थानीय सलाह और सुरक्षा इंतजाम के बिना एक छोटी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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