Cough syrup : खांसी की सिरप और अन्य दवाओं में जहरीले रसायनों की मिलावट के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने 10 रसायनों को “उच्च जोखिम” (High-Risk Solvents) की श्रेणी में शामिल करते हुए सभी राज्यों को इन पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय निगरानी प्रणाली होगी डिजिटल
सरकार ने ‘ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंस सिस्टम’ (ONDLS) नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिसके जरिए इन हाई-रिस्क रसायनों की पूरी सप्लाई चेन निर्माण से लेकर बाजार तक सभी पर सरकारी निगरानी रहेगी। इस प्रणाली को सी-डैक, नोएडा की सहायता से विकसित किया गया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल 21/ने बताया कि यह सिस्टम अब लाइव है और देशभर में तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
इन रसायनों पर होगी नजर
सरकार ने जिन रसायनों को उच्च जोखिम की सूची में डाला है, उनमें ग्लिसरीन, प्रोपाइलीन ग्लाइकोल, माल्टिटोल और माल्टिटोल सॉल्यूशन, सोर्बिटोल और सोर्बिटोल सॉल्यूशन, हाइड्रोजेनेटेड स्टार्च हाइड्रोलाइसेट, डाइएथिलीन ग्लाइकोल स्टिऐरेट्स, पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल, पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल मोनोमेथिल ईथर, पॉलीसॉर्बेट और पॉलीऑक्सिल कंपाउंड्स व एथिल अल्कोहल शामिल हैं।
सभी फार्मा कंपनियों को पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य
इन रसायनों का उपयोग करने वाली सभी औषधि निर्माण कंपनियों को अब ओएनडीएलएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जिन कंपनियों के पास पहले से निर्माण लाइसेंस मौजूद हैं, उन्हें भी अपनी जानकारी पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। आदेश में कहा गया है कि हाल ही में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और प्रोपाइलीन ग्लाइकोल (PG) जैसे रसायनों की मिलावट से कई कफ सिरप दूषित पाए गए, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे उत्पन्न हुए।
देश में भी लागू होगी सिरप की सरकारी जांच प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने अब यह भी तय किया है कि देश के भीतर बिकने वाले कफ सिरप की भी उसी तरह जांच होगी, जैसी विदेशों में निर्यात से पहले की जाती है। फार्मा कंपनियों को अब अपने उत्पादों को बाजार में उतारने से पहले सरकारी प्रयोगशालाओं से “सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस” (Certificate of Analysis) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही सिरप को बाजार में बेचा जा सकेगा।
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केंद्र का सख्त संदेश
सरकार का यह कदम दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी को मजबूत करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यह सिस्टम न केवल संदूषण के मामलों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि दवा निर्माण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा।

