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सेरोगेसी के नाम पर हो रही थी बच्चों की खरीद फरोख्त, हैदराबाद स्पर्म तस्करी मामले में ट्विस्ट

by | Jul 28, 2025 | देश

Hyderabad surrogacy racket : हैदराबाद में स्पर्म तस्करी से जुड़े एक मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर का असल में सेरोगेसी से कोई लेना-देना नहीं था. यह केंद्र गरीब महिलाओं से नवजात शिशुओं को खरीदता था और फिर इन बच्चों को आईवीएफ ट्रीटमेंट कराने आए कपल्स को महंगे दामों पर बेच देता था.

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा

पुलिस के अनुसार फर्टिलिटी सेंटर में आईवीएफ के लिए आए कपल्स को सेरोगेसी के लिए मनाया जाता था. उन्हें बताया जाता था कि जन्म लेने वाला बच्चा बायोलॉजिकल रूप से उनका ही होगा, जिसके बाद सेंटर की तरफ से 35 लाख रुपये की राशि वसूल की जाती थी. यह मामला तब सामने आया जब एक कपल ने गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कपल ने आरोप लगाया कि सेरोगेसी के बाद जो बच्चा उन्हें दिया गया था, उसका डीएनए पिता से मेल नहीं खा रहा था.

कैसे हुआ मामले का खुलासा

कपल के आरोपों के बाद पुलिस ने जांच की और पाया कि डॉक्टर नम्रता और उनके सहयोगियों ने किसी प्रकार की सेरोगेसी नहीं कराई थी. इसके बजाय एक गरीब महिला से नवजात शिशु को खरीद लिया गया था और इसे सेरोगेसी का बच्चा बताकर कपल को दे दिया गया. पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि बच्चा असम के रहने वाले एक दंपत्ति से लिया गया था. इन दंपत्ति को 90,000 रुपये का भुगतान किया गया था और महिला को विशाखापत्तनम में बच्चे की डिलीवरी के लिए भेजा गया था. नवजात शिशु दो दिन का था जब उसे सेरोगेसी के तहत कपल को सौंपा गया.

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आरोपी डॉक्टर का पुराना इतिहास

पुलिस ने यह भी बताया कि मुख्य आरोपी डॉक्टर अथालुरी नम्रता के खिलाफ पहले भी 10 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं. यह मामले विशाखापत्तनम, हैदराबाद और गुंटूर में दर्ज किए गए थे. इसके अलावा, 2016 और 2020 में डॉक्टर नम्रता पर गंभीर आरोप लगे थे. 2016 में, तेलंगाना मेडिकल काउंसिल ने उन्हें पांच साल के लिए लाइसेंस निलंबित कर दिया था, जब एक अमेरिकी एनआरआई कपल ने आरोप लगाया था कि सेरोगेसी के बाद उन्हें जो बच्चा दिया गया, वह उनका नहीं था. इसके बाद 2020 में विजाग पुलिस ने डॉक्टर नम्रता और उनके सहयोगियों को नवजात शिशुओं की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था.

भारत में बैन है कॉमर्शियल सेरोगेसी

डीसीपी ने यह भी बताया कि आरोपी केवल तस्करी ही नहीं कर रहे थे, बल्कि वे भारत में प्रतिबंधित कॉमर्शियल सेरोगेसी भी करवा रहे थे. भारत में केवल परोपकारी सेरोगेसी की अनुमति है,जबकि यह मामला व्यावसायिक रूप से बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ था. पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी डॉक्टर नम्रता भी शामिल हैं.

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