Mark Carney India Visit: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 27 फरवरी को मुंबई पहुंचकर अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत की। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में पैदा हुए तनाव को कम करना और संबंधों को नई दिशा देना है।
मुंबई में कार्यक्रमों की शुरुआत आर्थिक और कारोबारी बैठकों से हुई। प्रतिनिधिमंडल ने भारत के वित्तीय केंद्र में उद्योग जगत के प्रमुखों, निवेशकों और कनाडाई पेंशन फंड के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इस रणनीति का मकसद व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाशना है, ताकि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक सहयोग को मजबूत आधार दिया जा सके।
नई दिल्ली में अहम वार्ताएं
यात्रा के अगले चरण में नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ताएं निर्धारित हैं। हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, तकनीक और नवाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा बताया है। दोनों देश वैश्विक मंचों जैसे जी7 और जी20 पर भी सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं। आगामी बहुपक्षीय सम्मेलनों के संदर्भ में भी दोनों नेताओं के बीच अलग-अलग बैठकें प्रस्तावित हैं, जिससे दीर्घकालिक तालमेल को दिशा मिल सके।
निज्जर विवाद के बाद संबंधों में बदलाव
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते गंभीर तनाव में आ गए थे। उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने सख्ती से खारिज किया था।
उस विवाद के चलते दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और संबंध लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच गए थे। हालांकि अप्रैल 2025 में कार्नी के सत्ता संभालने के बाद नीति में बदलाव के संकेत मिले। ओटावा ने पहले के आरोपों से दूरी बनाई और संबंध सुधारने की पहल शुरू की।
सुरक्षा और सहयोग का नया ढांचा
हाल के महीनों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बैठकों ने आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ सहयोग का नया रोडमैप तैयार किया है। दोनों पक्षों ने सुरक्षा संवाद को फिर से सक्रिय किया है, जिससे भरोसा बहाल करने की प्रक्रिया तेज हुई है।
इसके साथ ही भारत-कनाडा सीईओ फोरम को भी पुनर्जीवित किया गया है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी से आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा मिल सके। व्यापार, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और प्रौद्योगिकी को सहयोग के प्रमुख स्तंभों के रूप में देखा जा रहा है।
‘सामान्यीकरण’ की दिशा में कदम
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा समय द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए उपयुक्त है। दोनों नेताओं ने “रचनात्मक और संतुलित साझेदारी” की आवश्यकता पर बल दिया है, जो पारस्परिक सम्मान और व्यावहारिक हितों पर आधारित हो।
कार्नी की यह यात्रा प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। इसे अतीत के विवादों को पीछे छोड़कर भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
भविष्य की ओर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में ठोस समझौते कर पाते हैं, तो यह साझेदारी नई मजबूती हासिल कर सकती है। खनिज सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और अनुसंधान सहयोग जैसे क्षेत्र दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।

