Union Budget 2026: केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट 1 फरवरी को पेश करने जा रही है। ये पहली बार हो रहा है, जब बजट रविवार को पेश होगा। फिलहाल, बजट को बनाने और पेश करने का प्रोसेस अपने आखिरी चरण में हैं। इसकी अगुआई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं और इन्हीं के मार्गदर्शन में वित्त मंत्रालय काम कर रहा है। देश का बजट कैसे बनता है, आज इसकी प्रक्रिया को जानते हैं।
पेश होने से 5-6 महीने पहले शुरू हो जाता है बजट बनना
यह सही है कि बजट 1 फरवरी को पेश होता है, लेकिन इसकी तैयारी पिछले साल के अगस्त-सितंबर से शुरू हो जाती है। सबसे पहले वित्त मंत्रालय का आर्थिक कार्य विभाग सभी मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजकर पूछता है कि उन्हें अगले साल के लिए कितने पैसों की जरूरत है। राज्यों को बताना होता है कि वे अगले वित्तीय वर्ष में किस योजना, पहल या सेक्टर पर कितनी राशि खर्च करेंगे।
सभी सहभागियों से मंत्रालय करता है चर्चा
वित्त मंत्रालय इन प्रस्तावों की जांच करता है और सुनिश्चित करता है कि राजकोषीय लक्ष्यों, उद्देश्यों और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप हों। कर व्यवस्था, निधियों के हस्तांतरण और केंद्र सरकार से जुड़ी योजनाओं पर राज्य सरकारों से परामर्श किया जाता है। इसके जरिए मंत्रालय आवंटन से पहले केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है। इसके साथ-साथ उद्योग निकायों, अर्थशास्त्रियों और अन्य हितधारकों के साथ भी सलाह मशवरा किया जाता है।
आम बजट बनाने की ज़िम्मेदारी किसकी?
आम बजट बनाने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DEA की होती है। इसमें वित्त मंत्री के साथ-साथ वित्त सचिव, राजस्व सचिव और व्यय सचिव की एक टीम होती है। इसके अलावा नीति आयोग और अलग-अलग मंत्रालयों के विशेषज्ञ आंकड़ों और अनुमानों पर काम करते हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) बजट के आर्थिक ढांचे को आकार देते हैं। उनका कार्यालय आर्थिक सर्वे रिपोर्ट तैयार करता है, जिसमें आर्थिक विकास, मुद्रास्फीति रुझान, राजकोषीय स्थिति, रोजगार और जोखिमों की जानकारी होती है।
बजट बनाने वालों को नॉर्थ ब्लॉक रखा जाता है
एक सीक्रेट मिशन के तहत बजट को तैयार किया जाता है। बजट पेश होने से पहले कुछ दिनों तक वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में रहते हैं। अधिकारियों को मोबाइल फोन और अन्य संचार साधनों के इस्तेमाल पर बैन रहता है। कैमरों और जैमर से लगातार निगरानी की जाती है, ताकि देश के सबसे अहम वित्तीय लेख से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक न हो सके।
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