BJP National President : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा अब कभी भी हो सकती है. पार्टी लंबे समय से इस फैसले को टालती आ रही थी,जिसका प्रमुख कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा नेतृत्व के बीच तल्ख होते रिश्तों को माना जा रहा था. हालांकि,हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सामान्य करने की दिशा में स्पष्ट प्रयास किए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व ने निजी स्तर पर मतभेदों को दूर करने की पहल की है. इसके संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों से भी मिले हैं, जिनमें दोनों ने एक-दूसरे की भूमिका की खुले तौर पर सराहना की है.
RSS और भाजपा के बीच तनाव
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा नेतृत्व द्वारा अब संघ की जरूरत नहीं जैसे बयानों ने संघ के भीतर असंतोष पैदा किया था. कहा जा रहा है कि इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन पर भी पड़ा, जहां पार्टी को बहुमत से कम 240 सीटें ही मिलीं, जबकि लक्ष्य 400 पार का था.
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बताया जा रहा है कि आरएसएस के कई कार्यकर्ता इस बार चुनाव प्रचार में अपेक्षित उत्साह के साथ सक्रिय नहीं रहे. हालांकि,बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में संघ को दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताते हुए उसकी प्रशंसा की, वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्वयंसेवक होने पर गर्व जताते हुए संघ की भूमिका को अहम बताया. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी संकेत दिए हैं कि राजनीति या समाज सेवा में रिटायरमेंट जैसी कोई अवधारणा नहीं होनी चाहिए. यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी वर्ष 75 वर्ष के हो जाएंगे वह उम्र सीमा जो पहले संघ प्रमुख ने सेवानिवृत्ति की उपयुक्त उम्र बताई थी.
राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में ये नाम सबसे आगे
भाजपा में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में फिलहाल चार केंद्रीय मंत्रियों के नाम चर्चा में हैं. जिसमें शिवराज सिंह चौहान (पूर्व मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री),नितिन गडकरी (वरिष्ठ नेता और पूर्व में पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं),मनोहर लाल खट्टर (हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री)और धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय मंत्री और ओडिशा से पार्टी का प्रमुख चेहरा) शामिल है.रिपोर्ट में सुत्रों के हावाले से कहा जा रहा है कि इनमें से किसी एक नाम पर भाजपा और संघ जल्द सहमति बना सकते हैं. हालांकि,भाजपा अतीत में अपने अप्रत्याशित निर्णयों के लिए जानी जाती रही है, ऐसे में अंतिम नाम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
संघ का हस्तक्षेप नहीं,सहयोग जरूरी
आरएसएस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह भाजपा या सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करता. हालांकि, संघ और भाजपा के बीच वैचारिक और सांगठनिक समन्वय लंबे समय से बना हुआ है, और नए अध्यक्ष के चयन में भी यही समन्वय अहम भूमिका निभा सकता है. अब जबकि दोनों संगठनों के बीच संबंध फिर से मधुर होते दिख रहे हैं, पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जल्द हो सकती है और यह फैसला भाजपा की भविष्य की रणनीति को भी तय करेगा.

