Bills to remove PM and CM : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विवादास्पद विधेयक पेश किया, जिसमें प्रस्ताव है कि यदि किसी मौजूदा मंत्री,मुख्यमंत्री या यहां तक कि प्रधानमंत्री को पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है,तो उन्हें एक महीने के भीतर अपना पद गंवाना पड़ सकता है.
विपक्ष के नारेबाजी के बाद स्थगित हुई कार्रवाई
विधेयक का एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध किया जिसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी,जिससे लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. ओवैसी ने विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि यह शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन करता है. यह कार्यकारी एजेंसियों को न्यायाधीश, जूरी और जल्लाद की भूमिका निभाने का अधिकार देता है. यह विधेयक अनिर्वाचित लोगों को जल्लाद की भूमिका निभाने का अधिकार देगा.
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उन्होंने कहा कि इस विधेयक की धाराओं का इस्तेमाल सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा सकता है. यह विधेयक गेस्टापो बनाने के अलावा और कुछ नहीं है. विधेयक में पूरी तरह से नया कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है जो जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों तथा केंद्र में केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री पर लागू होगा. हालांकि विधेयक में यह सुझाव दिया गया है कि बर्खास्त मंत्री,मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को हिरासत से रिहा होने के बाद पुनः नियुक्त किया जा सकता है. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह विवादास्पद विधेयक पूरी तरह से विनाशकारी हैं.
कांग्रेस ने भी जताया विरोध
अमित शाह द्वारा विधेयक पेश किए जाने के बाद तिवारी ने लोकसभा में कहा कि भारतीय संविधान कहता है कि कानून का शासन होना चाहिए और इसका आधार यह है कि जब तक आप दोषी साबित न हो जाएं, तब तक आप निर्दोष हैं. इस विधेयक से इसमें बदलाव की उम्मीद है. यह एक कार्यकारी एजेंसी के अधिकारी को प्रधानमंत्री का बॉस बनाता है. मनीष तिवारी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि वे विपक्षी नेताओं को विधेयकों के खिलाफ अपने तर्क प्रस्तुत करने दें.

