Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन वोटिंग से ठीक पहले सियासी मुकाबला अब निजी हमलों के नए स्तर पर पहुंच गया है। असम की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा विकास या नीतियां नहीं, बल्कि नेताओं के परिवार बनते नजर आ रहे हैं।
गोगोई बनाम हिमंता
हिमंत बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई के बीच चल रही सियासी जंग अब उनके निजी जीवन तक पहुंच गई है। शुरुआत में हिमंता सरमा, गोगोई की पत्नी को लेकर सवाल उठाते रहे, लेकिन अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए सरमा की पत्नी को निशाने पर ले लिया है।
कांग्रेस का बड़ा आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि सरमा की पत्नी के पास तीन देशों यूएई, एंटीगुआ-बारबुडा और मिस्र के पासपोर्ट हैं। साथ ही दुबई में संपत्तियों का भी मुद्दा उठाया गया, जिन्हें कथित तौर पर चुनावी हलफनामे में घोषित नहीं किया गया।
बीजेपी का पलटवार
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह झूठा और राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि वे और उनकी पत्नी अगले 48 घंटों में मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे। उनकी पत्नी ने भी आरोपों को “काल्पनिक” बताते हुए कांग्रेस पर गैर-जिम्मेदाराना राजनीति करने का आरोप लगाया।
पहले किसने शुरू किया था विवाद?
दरअसल, इस सियासी टकराव की शुरुआत तब हुई जब हिमंता सरमा ने गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबोर्न पर पाकिस्तान से कथित संबंधों के आरोप लगाए थे। यहां तक कि जासूसी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए, जिन्हें कांग्रेस ने सिरे से खारिज किया।
राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सरमा को घेरते हुए उन्हें “भ्रष्ट और सांप्रदायिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि असम की जनता को गुमराह किया गया है और इसका जवाब चुनाव में मिलेगा।
दस्तावेजों पर भी उठा विवाद
बीजेपी की ओर से सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पेश किए गए दस्तावेजों में कई गलतियां हैं, जिससे साफ है कि ये मनगढ़ंत और भ्रामक हैं।
सियासी मुद्दों से भटका चुनाव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के व्यक्तिगत आरोप चुनावी बहस को असल मुद्दों विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से भटका सकते हैं। असम चुनाव में अब सियासत का स्तर बदल चुका है। आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर वोटिंग से पहले और तेज हो सकता है। अब देखना होगा कि जनता इन व्यक्तिगत हमलों को कितना महत्व देती है और किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।
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