Air India Crash : 12 जून को हुए एयर इंडिया बोइंग 787-8 विमान हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की 12 जुलाई को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को “गैरजिम्मेदाराना” बताया, क्योंकि उसमें पायलटों की चूक का संकेत दिया गया था।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और डीजीसीए (DGCA) से जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि जांच में निष्पक्षता और पारदर्शिता जरूरी है, ताकि मृतकों और उनके परिवारों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
विमानन सुरक्षा NGO ने दाखिल की याचिका
यह जनहित याचिका विमानन सुरक्षा एनजीओ सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की ओर से दाखिल की गई है, जिसका नेतृत्व कैप्टन अमित सिंह (FRAeS) कर रहे हैं। याचिका में दावा किया गया कि जांच पैनल में शामिल तीन सदस्य सीधे विमानन नियामक से जुड़े हैं, जिससे हितों का टकराव (Conflict of Interest) पैदा होता है। साथ ही, एनजीओ ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में हादसे की जिम्मेदारी “फ्यूल कटऑफ स्विच” के गलत संचालन पर डाल दी गई, जिससे पायलट की गलती का आभास होता है। जबकि, रिपोर्ट में कई अहम तकनीकी जानकारियां जैसे डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR), कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) का पूरा ट्रांसक्रिप्ट और इलेक्ट्रॉनिक एयरक्राफ्ट फॉल्ट रिकॉर्डिंग (EAFR) शामिल नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि विमान हादसे से जुड़ी कुछ सूचनाएं अत्यंत संवेदनशील होती हैं और अगर इन्हें गलत तरीके से साझा किया जाए तो प्रतिस्पर्धी एयरलाइंस इसका फायदा उठा सकती हैं। इसलिए अदालत ने साफ किया कि वह केवल “स्वतंत्र, निष्पक्ष और शीघ्र जांच” सुनिश्चित करने के मुद्दे पर ही विचार कर रही है।
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अहमदाबाद से उड़ान के कुछ मिनटों बाद विमान मेडिकल हॉस्टल गिर
गौरतलब है कि 12 जून को अहमदाबाद (Air India Crash ) से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एयर इंडिया का विमान एक मेडिकल हॉस्टल परिसर में गिर गया था। इस दुर्घटना में विमान में सवार 241 यात्री और 12 क्रू सदस्य समेत कुल 265 लोगों की जान गई थी। मृतकों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश नागरिक, सात पुर्तगाली, एक कनाडाई और अन्य शामिल थे। हादसे में केवल एक ब्रिटिश नागरिक विश्वाशकुमार रमेश जीवित बचे।

