AI Impact Summit 2026 India: भारत ऐसे समय में 2026 एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित कर रहा है जब दुनिया राजनीतिक अनिश्चितता, भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबावों के दौर से गुजर रही है। इस बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में तकनीक एक स्थिरता देने वाले स्तंभ के रूप में उभर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस तकनीकी बदलाव की सबसे तेज और व्यापक लहर है। अनुमान है कि 2029 तक डेटा स्टोरेज, कंप्यूटिंग क्षमता और ऊर्जा आपूर्ति जैसे एआई ढांचे के निर्माण में करीब 3 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया जा सकता है। फिर भी इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि एआई वास्तव में समाज और अर्थव्यवस्था को कितना लाभ पहुंचाएगा। इसी कारण सम्मेलन में इसके जोखिम, अवसर और सीमाओं पर गंभीर चर्चा की उम्मीद है।
कल्पना या निकट भविष्य?
तेज प्रगति के बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) जल्द हासिल होने का दावा अतिशयोक्ति हो सकता है। 2025 में एरिक श्मिट और योशुआ बेंगियो सहित कई विशेषज्ञों ने एजीआई की परिभाषा तय करने की कोशिश की। उनके अनुसार एजीआई वह प्रणाली होगी जो एक सक्षम युवा इंसान जैसी बहु-क्षमता, तर्क और समझ प्रदर्शित करे। मानव बुद्धि को उन्होंने कई संज्ञानात्मक क्षेत्रों जैसे तर्क, स्मृति और बोध में बांटकर मशीनों का मूल्यांकन करने का ढांचा तैयार किया। इस परीक्षण से पता चलता है कि वर्तमान एआई मॉडल ज्ञान आधारित कार्यों में तो सक्षम हैं, लेकिन दीर्घकालिक स्मृति और बुनियादी समझ जैसी क्षमताओं में अभी भी गंभीर कमी है।
लाभ से जुड़ी एजीआई की अलग परिभाषा
कुछ कंपनियों ने एजीआई को तकनीकी नहीं बल्कि आर्थिक पैमाने से भी जोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार एक समझौते में एजीआई को उस स्थिति से जोड़ा गया था जब कंपनी का मुनाफा 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच जाए। लेकिन मौजूदा आय और भारी निवेश के अंतर को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक एजीआई अभी लंबी अवधि का लक्ष्य ही है।
दुनिया के प्रमुख लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) बनाने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ हो चुकी है। अब मुकाबला केवल एल्गोरिद्म का नहीं बल्कि कंप्यूटिंग शक्ति और चिप आपूर्ति का भी है। एआई चिप बाज़ार में कुछ कंपनियों का भारी वर्चस्व है और क्लाउड सेवाओं का बड़ा हिस्सा भी सीमित खिलाड़ियों के हाथ में केंद्रित है। यही वजह है कि एआई अब केवल तकनीकी नहीं बल्कि भू-राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
भारत की भूमिका
भारत का विशाल उपभोक्ता बाज़ार, किफायती इंजीनियरिंग प्रतिभा, अंग्रेजी में दक्ष कार्यबल और डिजिटल ढांचा इसे एआई निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।बड़ी टेक कंपनियों ने यहां अरबों डॉलर का निवेश किया है, लेकिन चुनौतियां भी मौजूद हैं। खासकर उन्नत एआई चिप्स तक पहुंच, ऊर्जा लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां। कुछ अंतरराष्ट्रीय टिप्पणियां यह भी दिखाती हैं कि एआई सहयोग अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।
रणनीतिक स्वायत्तता की जरूरत
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि उभरती तकनीकी शक्तियों को केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बनना होगा। भारत को वैश्विक सप्लाई चेन, मानक तय करने वाली संस्थाओं और तकनीकी गठबंधनों में अपनी जगह मजबूत करनी होगी। इसके लिए सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई मॉडल विकास में निरंतर निवेश आवश्यक है। इंडियाएआई मिशन इसी दिशा में एक शुरुआती कदम माना जा रहा है, हालांकि ऊर्जा और डेटा ढांचे को अभी काफी विस्तार चाहिए।
स्मॉल एआई का वैकल्पिक मॉडल
एक अलग दृष्टिकोण ‘स्मॉल एआई’ भी सामने आया है। इसमें भारी निवेश वाले विशाल मॉडल के बजाय संसाधनों के कुशल उपयोग और छोटे-विशेषीकृत मॉडलों पर जोर दिया जाता है।
सम्मेलन में “एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण” पर चर्चा हुई, जिसके मुख्य लक्ष्य हैं:
1. एआई संसाधनों को सुलभ और किफायती बनाना
2. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ओपन इनोवेशन को बढ़ाना
3. स्थानीय तकनीकी क्षमता का विकास
आर्थिक सर्वेक्षण भी इसी विचार को समर्थन देता है और एप्लिकेशन आधारित नवाचार, घरेलू डेटा के उपयोग तथा मानव पूंजी पर ध्यान देने की सलाह देता है।
जोखिम, भरोसा और सुरक्षा
कई विशेषज्ञों ने एआई के अनियंत्रित विकास को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि उन्नत एआई सिस्टम कभी-कभी गलत लक्ष्यों का पीछा कर सकते हैं, विशेषकर स्वायत्त एजेंटों के मामले में। हालिया रिसर्च से संकेत मिला है कि कुछ मॉडल संदर्भ के आधार पर खुद को बचाने जैसे व्यवहार दिखा सकते हैं। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर एआई सुरक्षा मानकों पर चर्चा तेज़ हो रही है।
क्या है एआई का भविष्य?
2022 में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद एआई में अचानक तेज उछाल देखा गया, जिसने डॉट-कॉम दौर की याद दिला दी। संभव है कि शुरुआती उत्साह के बाद कुछ निराशा भी आए, लेकिन जैसे इंटरनेट आज बिजली की तरह आवश्यक बन गया है, वैसे ही एआई भी दैनिक जीवन का हिस्सा बन सकता है। सही नीतियों और मार्गदर्शन के साथ एआई विज्ञान, अर्थव्यवस्था और समाज में बड़े बदलाव ला सकता है। एक ऐसी प्रगति जिसे बुद्धिमान विकास कहा जा सकता है।

