Indigo Airlines Crisis: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस समय ऐसे ऑपरेशनल संकट से जूझ रही है, जिसने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बीते दो दिनों में ही 200 से अधिक उड़ानें रद्द और सैकड़ों फ्लाइट्स घंटों की देरी से चलीं। राजधानी दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद, हैदराबाद, कोलकाता और इंदौर जैसे बड़े शहरों में 150 से ज्यादा विमान ग्राउंडेड होने से एयरपोर्ट पर लंबी कतारें और यात्री नाराज़गी का माहौल देखने को मिला।
कहाँ बिगड़ा इंडिगो का सिस्टम?
434 विमानों और 2300+ दैनिक उड़ानों के विशाल नेटवर्क वाली एयरलाइन के पास 5456 पायलट, 10,212 केबिन क्रू और करीब 41,000 कर्मचारी हैं। इसके बावजूद कंपनी पर क्रू की कमी का गंभीर आरोप लग रहा है। पायलट एसोसिएशन का दावा है कि वास्तविक समस्या पायलटों की भारी शॉर्टेज है, जिसे कंपनी तकनीकी दिक्कत, मौसम और भीड़ जैसे कारणों के पीछे छिपा रही है। आरोप तो यहाँ तक हैं कि इंडिगो इन हालातों का इस्तेमाल सरकार पर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) में ढील के लिए दबाव बनाने में कर रही है।
यात्रियों की जेब पर बड़ा झटका
फ्लाइट्स की भारी कैंसिलेशन का सीधा असर किराए पर पड़ा है। दिल्ली–मुंबई जैसे व्यस्त रूट पर टिकट कीमतें 4–5 हजार से बढ़कर 21–25 हजार रुपये तक पहुँच गईं, यानी करीब पाँच गुना इजाफा। छुट्टियों के सीजन में यह उछाल यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है। एयरलाइन ने माफी मांगते हुए अगले 48 घंटों में स्थिति सामान्य करने का आश्वासन दिया है। कंपनी ने परेशानी के लिए तकनीकी समस्याएं, खराब मौसम और FDTL नियमों को जिम्मेदार ठहराया।
यात्रियों को सलाह है कि वे एयरपोर्ट समय से पहले पहुँचें, ऐप पर लाइव स्टेटस चेक करते रहें और कैन्सिलेशन की स्थिति में रिफंड या रीबुकिंग का विकल्प तुरंत चुनें। छुट्टियों के इस सीजन में कनेक्टिंग फ्लाइट वालों को खास सतर्क रहने की जरूरत है।
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