Krishna Chhathi 2025 : भाद्रपद माह में जन्माष्टमी के छह दिन बाद श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाती है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ छोटे कान्हा को पारंपरिक भोग चढ़ाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को कढ़ी-चावल का भोग अवश्य लगाया जाता है। खास बात यह है कि यह कढ़ी बिना प्याज और लहसुन के बनाई जाती है, ताकि यह पूरी तरह सात्विक और भोग योग्य हो।
धार्मिक महत्व
कहा जाता है कि छठी पर कान्हा जी को चढ़ाए गए कढ़ी-चावल का भोग घर में सुख-समृद्धि लाता है। भक्त इसे प्रसाद रूप में ग्रहण कर परिवार के साथ बांटते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि भारतीय खानपान की सरलता और स्वाद को भी दर्शाती है।
क्यों चढ़ाया जाता है कढ़ी-चावल का भोग?
हिंदू परंपरा में छठी का विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने बाल्यकाल में छठे दिन मां यशोदा से पहली बार कढ़ी-चावल का प्रसाद ग्रहण किया था। तभी से यह प्रथा चली आ रही है कि कान्हा को छठी पर कढ़ी-चावल का भोग लगाया जाता है।
कान्हा जी के लिए बिना प्याज-लहसुन वाली कढ़ी बनाने की विधि
सामग्री– दही – 2 कप, बेसन – 4 बड़े चम्मच, घी – 2 बड़े चम्मच, हींग – चुटकीभर, मेथी दाना – ½ छोटा चम्मच, जीरा – 1 छोटा चम्मच, हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी हुई), अदरक – 1 छोटा टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ), करी पत्ता – 8-10, हल्दी पाउडर – ½ छोटा चम्मच, नमक – स्वादानुसार, पानी – आवश्यकतानुसार।
पकौड़ी के लिए– बेसन – 1 कप, अजवाइन – ½ छोटा चम्मच, नमक – स्वादानुसार, तेल – तलने के लिए।
बनाने की विधि
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1. पकौड़ी तैयार करें- बेसन में अजवाइन, नमक और पानी डालकर गाढ़ा घोल बना लें। गरम तेल में छोटे-छोटे पकौड़े तलकर अलग रख लें।
2. कढ़ी का बेस तैयार करें- एक बर्तन में दही और बेसन को अच्छे से फेंट लें, ताकि गांठ न रह जाए। इसमें हल्दी और नमक डालकर पानी मिलाएं।
3. तड़का लगाएं- कढ़ाई में घी गरम करें। इसमें हींग, मेथी दाना, जीरा, करी पत्ता, हरी मिर्च और अदरक डालकर भूनें।
4. कढ़ी पकाएं- अब इसमें दही-बेसन का घोल डाल दें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं। जब कढ़ी गाढ़ी हो जाए और उबाल आने लगे तो इसमें तैयार पकौड़ियां डाल दें।
5. भोग के लिए तैयार- गर्मागर्म सात्विक कढ़ी को भाप में पके चावल के साथ भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाएं।

