Fake Herbal Colors: रंगों का पर्व होली देशभर में उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं और खुशियां बांटते हैं। लेकिन बाजार में बिक रहे नकली या मिलावटी हर्बल रंग आपकी त्वचा और सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि रंग खरीदते समय सावधानी बरती जाए। आइए जानते हैं कैसे पहचानें असली और नकली हर्बल रंग।
होली का त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसकी शुरुआत होलिका दहन से होती है। इस वर्ष 4 मार्च को रंगों का उत्सव मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पूर्णिमा की रात किया जाने वाला यह संस्कार सामाजिक सौहार्द और आपसी मेलजोल का संदेश देता है। मान्यता है कि इस अग्नि में मन की नकारात्मकता भी भस्म हो जाती है। अगले दिन लोग घरों में पकवान बनाते हैं और मेहमानों के साथ त्योहार का आनंद लेते हैं।
रंगों में मिलावट का बढ़ता खतरा
भारत में होली के दौरान बड़े पैमाने पर रंगों का इस्तेमाल होता है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार कई सिंथेटिक रंगों में एंडोटॉक्सिन जैसे रसायन और लेड जैसे भारी धातु मिलाए जाते हैं, जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक हो सकते हैं। पहले के समय में रंग फूलों और प्राकृतिक तत्वों से तैयार किए जाते थे, लेकिन अब बड़े स्तर पर उत्पादन और मुनाफे के कारण मिलावटी रंग बाजार में बेचे जा रहे हैं।
अक्सर सिंथेटिक रंगों को ‘हर्बल’ बताकर खुले में या बिना उचित लेबलिंग के बेचा जाता है। कई बार विक्रेताओं को भी यह जानकारी नहीं होती कि रंग कहां तैयार हुआ है या उसमें किन तत्वों का प्रयोग किया गया है।
ऐसे करें हर्बल रंग की पहचान
चमक देखकर पहचानें
अगर कोई रंग या गुलाल असामान्य रूप से ज्यादा चमकदार दिखाई दे रहा है, तो उसमें मिलावट की आशंका हो सकती है। प्राकृतिक रंग हल्के और मृदु होते हैं, उनमें कृत्रिम चमक नहीं होती। अत्यधिक चमक का मतलब हो सकता है कि उसमें एल्युमिनियम पाउडर या कांच का महीन चूरा मिलाया गया हो, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।
खुशबू से करें जांच
असली हर्बल गुलाल में हल्की प्राकृतिक सुगंध होती है, जैसे फूलों या जड़ी-बूटियों की। यदि रंग से पेट्रोल, केरोसिन या तेज रासायनिक गंध आ रही हो, तो वह सिंथेटिक हो सकता है। ऐसे रंग त्वचा एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
पानी में घोलकर देखें
एक गिलास पानी में थोड़ा सा रंग डालें। शुद्ध रंग पानी में आसानी से घुल जाता है, जबकि मिलावटी रंग ऊपर तैर सकता है या नीचे तलछट के रूप में जम सकता है। यदि पानी में कचरा या अवशेष नजर आए, तो उस रंग का उपयोग न करें।
रंग खरीदते समय बरतें ये सावधानियां
पैकेट पर लिखी जानकारी ध्यान से पढ़ें।
नेचुरल,ऑर्गेनिक या इको-फ्रेंडली प्रमाणित उत्पाद ही चुनें।
बहुत गहरे और तेज रंगों से बचें, क्योंकि इनमें मिलावट की संभावना अधिक होती है।
खुले में बिक रहे बिना ब्रांड वाले रंग खरीदने से बचें।
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