Eco Friendly Diwali 2025 : दिवाली, रोशनी और खुशियों का पर्व, हर साल घर-आंगन को दीपों की जगमगाहट और उत्सव की उमंग से भर देता है। लेकिन समय के साथ यह त्योहार पर्यावरण के लिए चुनौती भी बन गया है। पटाखों का धुआं, केमिकल से बनी सजावट और प्लास्टिक के उपयोग से वायु और ध्वनि प्रदूषण तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में अब वक्त है कि हम “ग्रीन दिवाली” यानी इको-फ्रेंडली दिवाली की ओर कदम बढ़ाएं। जहां खुशियां तो हों, लेकिन प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।
मिट्टी के दीयों से जगमगाएं घर
बिजली की झालरों की जगह मिट्टी के दीयों का उपयोग न केवल पारंपरिक सौंदर्य बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण की भी रक्षा करता है। देसी घी या सरसों के तेल से जलाए गए दीये वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं और साथ ही स्थानीय कुम्हारों की आजीविका को भी समर्थन मिलता है।
आतिशबाजी की जगह अपनाएं संगीत और फूलों की महक
पटाखों का शोर और धुआं जहां बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर असर डालता है, वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके स्थान पर फूलों की सजावट, रंगोली, दीपमालाएं और भजन-संगीत से घर का माहौल सजाएं। यह न सिर्फ सुंदर लगेगा बल्कि वातावरण भी शांत और स्वच्छ रहेगा।
प्राकृतिक सजावट से बढ़ाएं खूबसूरती
इस दिवाली घर की सजावट में प्लास्टिक की बजाय प्राकृतिक विकल्प अपनाएं। पेपर लैम्प्स, जूट, सूती कपड़े या ताजे फूलों से सजे घर न केवल आकर्षक दिखते हैं बल्कि प्रदूषण रहित भी रहते हैं। तुलसी, मनी प्लांट या बांस जैसे पौधे घर के द्वार पर लगाकर शुभता और ताजगी दोनों बढ़ाएं।
देसी मिठाइयां और सस्टेनेबल गिफ्ट्स
त्योहार पर गिफ्ट देने की परंपरा को “ग्रीन गिफ्टिंग” में बदलें। प्लास्टिक पैकिंग के बजाय घर की बनी मिठाइयां जैसे गुड़-नारियल लड्डू या ओट्स बर्फी दें। उपहार में पौधे, मिट्टी के बर्तन, हैंडमेड कैंडल्स या जूट बैग जैसे टिकाऊ विकल्प चुनें।
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खुशियों के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
दिवाली की असली रोशनी तभी फैलती है जब उसमें खुशियां और जिम्मेदारी का समावेश हो। इस साल प्रदूषण के धुएं के बजाय हरियाली और अपनत्व की रोशनी जलाएं। छोटी-छोटी पहल मिलकर बड़ा बदलाव ला सकती हैं और हमें एक स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर भविष्य की ओर ले जा सकती हैं।

